BHU में पहली बार शिक्षकों की कलाकृतियों की सामूहिक प्रदर्शनी, CII बनारस बिनाले में दिखी रचनात्मकता

वाराणसी, 16 अक्टूबर 2026। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के दृश्य कला संकाय में CII बनारस बिनाले 2026 के अंतर्गत आयोजित ‘कला आचार्य चित्रकला कार्यशाला’ की कलाकृतियों की प्रदर्शनी शुक्रवार को अहिवासी कला वीथिका में लगाई गई। इस चार दिवसीय कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लिया। आयोजन की विशेष उपलब्धि यह रही कि पहली बार विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के शिक्षकों की कलाकृतियों को एक साझा मंच पर सामूहिक रूप से प्रदर्शित किया गया।

12 से 15 अक्टूबर तक आयोजित इस कार्यशाला में शिक्षकों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा, अनुभवों और रचनात्मक विचारों को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। प्रदर्शनी में विभिन्न कला-माध्यमों और व्यक्तिगत कलात्मक दृष्टिकोणों से तैयार रचनाओं को देखने का अवसर मिला।

‘बनारस’ की विरासत और भविष्य को चित्रों में उकेरा

कार्यशाला की विषयगत अवधारणा CII बनारस बिनाले 2026 की मुख्य थीम ‘Banaras: Time Woven in Light — Past, Present and Future in One Image’ से प्रेरित रही। इस थीम के माध्यम से बनारस की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं, वर्तमान जीवन और भविष्य की संभावनाओं को चित्रकला के जरिए अभिव्यक्त करने पर जोर दिया गया।

शिक्षकों ने अपनी कल्पनाशीलता, अनुभवों और विभिन्न कला-माध्यमों के प्रयोग से विषय के अलग-अलग पहलुओं को प्रस्तुत किया। इससे प्रदर्शनी में कलात्मक अभिव्यक्ति की विविधता देखने को मिली।

कई विभागों और महाविद्यालयों के शिक्षकों की भागीदारी

कार्यशाला का समन्वय डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने किया। मूर्तिकला विभाग, चित्रकला विभाग, व्यावहारिक कला विभाग और कला एवं अभिकल्पन का इतिहास विभाग के शिक्षकों ने इसमें सहभागिता की।

इसके अतिरिक्त महामना मालवीय महिला महाविद्यालय (MMV), वसंत कन्या महाविद्यालय (VCW) और VKM के शिक्षकों ने भी अपनी कलात्मक भागीदारी दर्ज कराई। विभिन्न विभागों और संस्थानों के शिक्षकों के एक साथ आने से प्रदर्शनी को अलग-अलग कलात्मक दृष्टियों, शैलियों और रचनात्मक प्रयोगों से समृद्ध होने का अवसर मिला।

CII बनारस बिनाले 2026 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में अडानी समूह से जुड़े क्यूरेटर सत्यजीत दवे भी उपस्थित रहे। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।

कला, शिक्षा और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा

कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को कला-सृजन के लिए साझा मंच प्रदान करना, विभिन्न कलात्मक माध्यमों में प्रयोग को प्रोत्साहित करना और उनके बीच रचनात्मक संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा देना था। चार दिनों तक चली इस प्रक्रिया में तैयार कलाकृतियों की सामूहिक प्रदर्शनी ने इस उद्देश्य को सामने रखा।

यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए भी शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शिक्षकों की कलाकृतियों, उनकी रचनात्मक प्रक्रिया और विभिन्न कला-माध्यमों में किए गए प्रयोगों को देखकर विद्यार्थियों को कला की विविध शैलियों और तकनीकों को समझने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, यह उन्हें अपनी कल्पनाशीलता विकसित करने और नए कलात्मक प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

‘कला आचार्य चित्रकला कार्यशाला’ के माध्यम से BHU में कला, शिक्षा और सांस्कृतिक सहभागिता को एक साझा मंच मिला। विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों की सामूहिक भागीदारी ने अंतर्विभागीय सहयोग और रचनात्मक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल प्रस्तुत की।

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