BHU Doctors: Sleep Apnea के इलाज में BHU के डॉक्टरों की बड़ी उपलब्धि, नए डेंटल डिवाइस को मिला भारतीय पेटेंट

BHU Doctors: नींद के दौरान सांस रुकने और तेज खर्राटों की समस्या से परेशान मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के दंत चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा विकसित एक विशेष उपकरण को भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया है। यह उपकरण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) के प्रबंधन में मददगार साबित हो सकता है। इसे मैंडिबुलर एडवांसमेंट डिवाइस (Mandibular Advancement Device-MAD) नाम दिया गया है। इस तकनीक के जरिए बिना सर्जरी के मरीज के निचले जबड़े को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाकर सांस लेने के रास्ते को खुला रखने में मदद मिलती है।

इस अभिनव उपकरण को डॉ. विपुल शर्मा, डॉ. टी.पी. चतुर्वेदी और डॉ. एच.सी. बरनवाल ने विकसित किया है। चिकित्सा और दंत चिकित्सा के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह उपकरण मरीज की जरूरत के अनुसार समायोजित किया जा सकता है।

क्या है मैंडिबुलर एडवांसमेंट डिवाइस, कैसे करेगा काम?

पेटेंट प्राप्त मैंडिबुलर एडवांसमेंट डिवाइस एक विशेष प्रकार का मौखिक उपकरण (Oral Appliance) है, जिसे दंत चिकित्सक की सलाह और मरीज की जरूरत के अनुसार तैयार किया जाता है। इसमें एक नियंत्रित और समायोज्य तंत्र दिया गया है, जिसकी मदद से निचले जबड़े यानी मैंडिबल को धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ाया जा सकता है।

दरअसल, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या में सोते समय गले की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं। इससे ऊपरी श्वसन मार्ग संकरा हो सकता है या कुछ समय के लिए बंद हो सकता है। परिणामस्वरूप मरीज की सांस बार-बार रुकती है और नींद प्रभावित होती है।

ऐसी स्थिति में यह उपकरण निचले जबड़े को आगे की स्थिति में बनाए रखने में मदद करता है। इससे जीभ और आसपास के ऊतकों की स्थिति में बदलाव आता है तथा ऊपरी श्वसन मार्ग का स्थान बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। इसका उद्देश्य नींद के दौरान सांस लेने की प्रक्रिया को सुगम बनाना और वायुमार्ग में होने वाले अवरोध को कम करना है।

मरीजों की जरूरत के अनुसार होगा समायोजित

डॉ. विपुल शर्मा ने बताया कि यह उपकरण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित उपयुक्त मरीजों के लिए एक सुविधाजनक और गैर-शल्य चिकित्सा विकल्प प्रस्तुत करता है। इसकी समायोज्य संरचना के कारण प्रत्येक मरीज की व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार निचले जबड़े की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि डेंटल स्लीप मेडिसिन दंत चिकित्सा की एक उभरती हुई शाखा है। इसके माध्यम से जबड़ों की असामान्यताओं और श्वसन मार्ग से जुड़ी समस्याओं के कारण खर्राटे लेने वाले तथा नींद में सांस संबंधी परेशानी झेलने वाले मरीजों की मदद की जा सकती है।

क्या है स्लीप एपनिया और इसके प्रमुख लक्षण?

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) नींद से जुड़ा एक गंभीर श्वसन विकार है। इसमें सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली पड़ने के कारण सांस लेने का रास्ता बार-बार संकरा या अवरुद्ध हो जाता है। इससे कुछ समय के लिए सांस रुक सकती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है।

इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज और लगातार खर्राटे लेना।
  • सोते समय अचानक दम घुटना या हांफकर उठना।
  • सुबह उठने पर सिरदर्द या मुंह सूखना।
  • पर्याप्त नींद के बावजूद दिनभर थकान और नींद आना।
  • चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी।

स्वदेशी चिकित्सा नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

डॉ. टी.पी. चतुर्वेदी ने कहा कि यह पेटेंट अंतर्विषयक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह मरीजों की चिकित्सा और देखभाल को बेहतर बनाने वाले व्यावहारिक समाधानों के विकास के प्रति शोधकर्ताओं की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि इस तरह के स्वदेशी नवाचार से दंत चिकित्सा और निद्रा चिकित्सा के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, स्लीप एपनिया जैसी महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य समस्या के प्रबंधन के लिए नए विकल्प विकसित करने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

इस उपलब्धि से चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञों की भूमिका को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस उपकरण का उपयोग मरीज की चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

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