न क्लिक, न डाउनलोड! सिर्फ विज्ञापन देखते ही हैक हो सकता है फोन? इजराइली स्पायवेयर ने बढ़ाई चिंता

हैदराबाद: टेक्नोलॉजी की दुनिया जितनी तेजी से आगे बढ़ती जा रही है, उतनी ही तेजी से साइबर क्राइम करने वाले क्रिमिनल्स के क्राइम करने वाले तौर-तरीके भी डेवलप होते जा रहे हैं. आजकल हैकर्स ने एक नया और बहुत खतरनाक तरीका निकाल लिया है. अब उन्हें आपका फोन हैक करने के लिए आपके फोन पर कोई लिंक भेजकर आपसे क्लिक करवाने या फाइल डाउनलोड करवाने की भी जरूरत नहीं है.

अब हैकर्स आपको सिर्फ एक विज्ञापन दिखाएंगे और फोन या कंप्यूटर में स्पायवेयर डाल सकते हैं. इस तरीके को AdFection कहा जा रहा है. ये तरीका इज़राइल की कंपनी Discover-Tech ने बनाया है. ये बात Citizen Lab और Confiant नाम की साइबर सिक्योरिटी कंपनी की जांच से सामने आई है. उन्होंने पाया कि इस टेक्नोलॉजी से अल जरीरा न्यूज़ नेटवर्क के पत्रकारों और कर्मचारियों के कम से कम 45 डिवाइस हैक हो गए. इन डिवाइस में Candiru नाम की दूसरी इजरायली कंपनी का स्पायवेयर डाला गया.

विज्ञापन सिस्टम को जासूसी का हथियार कैसे बनाया

इंटरनेट पर हर दिन खरबों विज्ञापनों का लेन-देन होता है. ये सब रियल-टाइम बिडिंग नाम के सिस्टम से चलता है. आप जब कोई वेबसाइट खोलते हैं, तो तुरंत कई कंपनियां उस जगह के लिए बोली लगाती है. Discover-Tech इसी सिस्टम का इस्तेमाल करती थी. वो यूज़र्स की लोकेशन, आईपी एड्रेस और ब्राउज़िंग हिस्ट्री देखकर टारगेट चुनती थी. अगर कोई व्यक्ति निशाने पर होता है तो उसके डिवाइस पर नॉर्मल लगने वाले एड में छिपा हुआ खराब कोड भेज दिया जाता था. ये कोड बिना किसी एक्शन के भी फोन में घुस जाता था.

मार्च से जून 2026 के बीच Discover-Tech ने 3.7 अरब बार बोली लगाई और 44.2 करोड़ बार उन बोलियों को जीता. उसके विज्ञापन 1.2 लाख से ज्यादा वेबसाइट्स पर दिखें. इनमें बीबीसी और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसी बड़ी वेबसाइट्स भी शामिल थीं. इसके साथ डिस्कवर-टेक के ये विज्ञापन करीब 70 हजार से ज्यादा मोबाइल ऐप्स पर भी पहुंचे, जिनमें याहू मेल, डुओलिंगो, बाडू और ग्राइंडर जैसे ऐप्स भी इसमें थे.

किन-किन को बनाया गया निशाना

अल जजीरा के अलावा नाटो, यूरोपियन कमीशन, एनवीडिया और आर्म जैसी कंपनियों के लोगों पर भी ये विज्ञापन टारगेट किए गए. नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क के सरकारी ऑफिसों, पुलिस और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े लोगों के डिवाइसों को भी निशाना बनाने के लिए टारगेट किया गया था. इनता ही नहीं, अमेरिका के डिफेंस कंपनी थियॉन और सेमीकंडक्टर कंपनियों के कर्मचारी भी इसमें शामिल थे.

सिटिजन लैब के रिसर्चर बिल मार्चक ने कहा कि डिस्कवर-टेक सिर्फ शुरुआत है. विज्ञापन सिस्टम में घुसकर स्पायवेयर कंपनियां चुपके से टारगेट ढूंढ सकती हैं और हैक कर सकती हैं. गूगल ने जांच के बाद डिस्कवर-टेक को अपने ऐड प्लेटफॉर्म से ब्लॉक कर दिया. आईएबी यूरोप ने भी कंपनी को सस्पेंड कर दिया.

डिस्कवर-टेक की स्थापना 2020 में डेकेल बोनी ने की थी. कंपनी खुद को नॉर्मल ऐड कंपनी बताती थी, लेकिन असल में स्पायवेयर कंपनियों के लिए पुल का काम करती थी. Candiru को पहले भी 2021 में अमेरिका ने ब्लैकलिस्ट किया था. ये तरीका दिखाता है कि ऑनलाइन ऐड सिस्टम कितना खतरनाक हो सकता है जब गलत हाथों में चला जाए.

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