मां गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा देकर कांग्रेस ने रचा इतिहास? राघवेंद्र चौबे का बड़ा बयान

वाराणसी। मां गंगा की निर्मलता, स्वच्छता और अविरलता की कामना के साथ महानगर कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में शीतला घाट पर माँ गंगा का दुग्धाभिषेक एवं पूजन-अर्चन किया गया।

कार्यक्रम का संयोजन महानगर महासचिव प्रमोद वर्मा ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश प्रमुख सेवादल डॉ. प्रमोद पांडेय मौजूद रहे, इस अवसर पर डॉ. प्रमोद पांडेय ने कहा कि 5 नवंबर 2008 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कर देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सम्मान दिया था।

तभी से वाराणसी में कांग्रेसजनों द्वारा निरंतर शीतला घाट पर दुग्धाभिषेक किया जाता रहा है, उन्होंने कहा कि गंगा के तीन पक्ष हैं- आध्यात्मिक, व्यावहारिक और वैज्ञानिक। गंगा केवल जलधारा नहीं, सनातन संस्कृति की आत्मा है। हिंदू आचमन कर पूजा करता है तो मुसलमान वजू कर नमाज अदा करता है। उन्होंने चिंता जताई कि उन्नाव से बनारस तक 360 किमी का पैच सबसे ज्यादा गंदा है, कानपुर-उन्नाव के चमड़ा उद्योग से BOD बढ़ रही है।

राजीव गांधी के समय शुरू हुए गंगा एक्शन प्लान के तहत STP बनीं, लेकिन 2014 के बाद नमामि गंगे नाम देकर गंगा को सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ के लिए उपयोग किया गया, महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि माँ गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था और जीवन का आधार हैं। कांग्रेस ने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया।

कहा क‍ि आज स्वच्छता की बड़ी-बड़ी बातें करने वालों को याद रखना चाहिए कि यह ऐतिहासिक निर्णय कांग्रेस सरकार ने लिया था। गंगा की स्वच्छता सरकारी घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों और जनभागीदारी से होगी, कार्यक्रम में सतनाम सिंह, प्रमोद वर्मा, प्रवीण प्रकाश, वकील अंसारी, देवेन्द्र सिंह, मनोज द्विवेदी, नरसिंह दास, आकाश त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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