वाराणसी। त्योहारों पर मिठाइयों की मांग बढ़ते ही मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। लोगों को शुद्ध मिठाई और दूध से बने उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की ओर से छापेमारी और सैंपलिंग अभियान चलाया जाता है। लेकिन वाराणसी में इस अभियान की रफ्तार और कार्रवाई के नतीजों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि रक्षाबंधन के दौरान लिए गए मिठाई और खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच रिपोर्ट त्योहार बीतने के काफी समय बाद सामने आई। विभाग को मिली रिपोर्ट में छह नमूने जांच में फेल पाए गए, जबकि 13 नमूनों की रिपोर्ट अब तक लंबित बताई जा रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि फेल नमूनों के मामलों में भी अब तक अंतिम दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
31 जगहों से लिए गए थे सैंपल, 6 जांच में फेल
रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए अगस्त महीने में खाद्य सुरक्षा विभाग ने वाराणसी में अलग-अलग स्थानों पर अभियान चलाकर 31 जगहों से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए थे। इनमें मिठाई, पनीर, खोआ और अन्य डेयरी उत्पाद शामिल थे। जांच के लिए नमूने राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला, लखनऊ भेजे गए थे।
विभाग को मिली रिपोर्ट में छह नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। वहीं, 13 नमूनों की जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई थी। रिपोर्ट में पनीर में मिलावट के मामले सबसे अधिक सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि हो रही है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है?
523 किलो मिठाई और खोआ नष्ट, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
रक्षाबंधन के दौरान खाद्य विभाग ने विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर करीब 523 किलो मिठाई और खोआ नष्ट कराया था। उस समय विभाग ने दावा किया था कि जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
लेकिन 60 दिनों से अधिक समय बीतने के बावजूद फेल पाए गए छह नमूनों के मामलों में अंतिम कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर जब संदिग्ध खाद्य सामग्री को नष्ट कर दिया जाता है, तो उसके जिम्मेदार कारोबारियों पर कार्रवाई में देरी क्यों होती है?
वाराणसी में 2200 से अधिक दुकानें, निगरानी के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं
वाराणसी जिले में छोटी-बड़ी करीब 2200 से अधिक मिठाई और डेयरी उत्पादों की दुकानें संचालित होने का अनुमान है। वहीं, दीपावली के दौरान पांच दिनों में जिले में करीब 25 हजार कुंतल मिठाई की खपत होने का आंकड़ा बताया जा रहा है।
इतनी बड़ी खपत और हजारों दुकानों की निगरानी के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी और बुनियादी संसाधन नहीं होने की समस्या भी सामने आती रही है। इसका असर अभियान पर दिखाई देता है। कार्रवाई अक्सर मुख्य सड़कों और चुनिंदा प्रतिष्ठानों तक सीमित रह जाती है, जबकि घनी आबादी वाले इलाकों और छोटी बस्तियों में मिलावटी खोआ और मावा की बिक्री पर प्रभावी निगरानी चुनौती बनी हुई है।

रिपोर्ट आने तक बिक जाती है पूरी मिठाई, जांच व्यवस्था पर सवाल
खाद्य सुरक्षा विभाग की सबसे बड़ी चुनौती नमूनों की जांच में लगने वाला समय है। नमूने लेने के बाद उन्हें राजकीय विश्लेषक प्रयोगशाला, लखनऊ भेजा जाता है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच रिपोर्ट आने में सामान्यतः 14 से 30 दिनों का समय लग सकता है, लेकिन कई मामलों में रिपोर्ट आने में इससे अधिक समय लगने की शिकायत है।
इस देरी का सीधा असर कार्रवाई पर पड़ता है। जब तक प्रयोगशाला से रिपोर्ट आती है, तब तक संबंधित मिठाई या खाद्य पदार्थ का पूरा बैच बाजार में बिक चुका होता है। ऐसे में मिलावट की पुष्टि होने के बावजूद उपभोक्ताओं तक पहुंच चुके खाद्य पदार्थों को वापस लेना मुश्किल हो जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में वाराणसी में 39 खाद्य नमूने जांच में फेल हुए हैं। जांच में दूध की तुलना में पनीर में मिलावट के अधिक मामले सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में 21.52 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है।
क्या बोले खाद्य विभाग के अधिकारी?
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त कौशलेंद्र शर्मा के अनुसार, जांच में फेल हुए नमूनों के मामलों में संबंधित कारोबारियों के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान ही नियमानुसार जुर्माना निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग पहले भी मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
दीपावली से पहले फिर सक्रिय हुआ विभाग, लेकिन कब मिलेगी मिलावट से राहत?
दीपावली नजदीक आते ही खाद्य विभाग की ओर से एक बार फिर मिठाई, खोआ, मावा और पनीर की दुकानों पर छापेमारी और सैंपलिंग की जा रही है। लेकिन पिछले अभियानों की रिपोर्ट और कार्रवाई में हुई देरी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
त्योहारों पर लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों के लिए मिठाइयां खरीदते हैं। ऐसे में केवल सैंपल लेना और संदिग्ध खाद्य सामग्री नष्ट करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि जांच रिपोर्ट समय पर आए, दोषी कारोबारियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई हो और बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर त्योहार खत्म होने के बाद मिलावट की रिपोर्ट सामने आएगी, तो उपभोक्ताओं को समय रहते सुरक्षित खाद्य पदार्थ कैसे मिल पाएंगे? वाराणसी में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का असली असर तभी दिखाई देगा, जब मिलावटखोरों पर समयबद्ध कार्रवाई होगी और आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी रोक लगेगी।
