Varanasi: वीरेंद्र सहवाग ने किए काशी विश्वनाथ के दर्शन, आधे घंटे किया ॐ नमः शिवाय जाप

वाराणसी। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग सोमवार को धर्म नगरी काशी पहुंचे। यहां उन्होंने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। क्रिकेट के मैदान पर अपने आक्रामक अंदाज से गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले सहवाग काशी में पूरी तरह भक्ति के रंग में नजर आए। उन्होंने मंदिर में करीब आधे घंटे तक बैठकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया और भगवान शिव की आराधना की।

सहवाग की काशी यात्रा की तस्वीरें और उनका सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में है। उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा को साझा करते हुए लिखा, “जहां महादेव का बुलावा आ जाए, वहां जाना अपने आप में सौभाग्य है।”

टोपी-मास्क लगाकर काशी की गलियों में घूमे सहवाग

वीरेंद्र सहवाग ने काशी पहुंचने के बाद आम श्रद्धालु की तरह मंदिरों और गलियों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने टोपी और मास्क लगा रखा था, जिसके चलते आसपास मौजूद लोग उन्हें पहचान नहीं सके। सहवाग चौक थाने से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4 तक पैदल पहुंचे।

इस दौरान उन्होंने काशी की गलियों में घूमने के साथ शहर के विभिन्न मंदिरों में भी दर्शन-पूजन किया। बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचकर उन्होंने विधि-विधान से पूजा की और काफी देर तक आध्यात्मिक साधना में समय बिताया।

मुल्तान के सुल्तान ने क्रिकेट की दुनिया में बनाए कई रिकॉर्ड

वीरेंद्र सहवाग को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में गिना जाता है। ‘नजफगढ़ के नवाब’ और ‘मुल्तान के सुल्तान’ के नाम से मशहूर सहवाग ने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी से दुनिया भर के गेंदबाजों के सामने चुनौती पेश की। उनकी ‘देख गेंद, मार गेंद’ वाली शैली ने टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाजी के पारंपरिक अंदाज को नई पहचान दी।

सहवाग ने वर्ष 1999 में वनडे क्रिकेट और 2001 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। टेस्ट करियर की शुरुआत भी उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक लगाकर की थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं।

मुल्तान में जड़ा 309 रन का ऐतिहासिक तिहरा शतक

मार्च 2004 में पाकिस्तान के मुल्तान में सहवाग ने 309 रनों की यादगार पारी खेली। इसके साथ ही वह टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए। उनकी इस ऐतिहासिक पारी ने उन्हें ‘मुल्तान का सुल्तान’ नाम दिलाया।

इसके बाद वर्ष 2008 में चेन्नई टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सहवाग ने 278 गेंदों पर 319 रन बनाए। यह टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज तिहरा शतक है। वह टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक लगाने वाले दुनिया के चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हैं।

वनडे में भी दोहरा शतक लगाकर रचा इतिहास

टेस्ट क्रिकेट के साथ-साथ वनडे में भी सहवाग का बल्ला खूब चला। दिसंबर 2011 में इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने 219 रनों की विस्फोटक पारी खेली। इस उपलब्धि के साथ वह वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने।

उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारतीय क्रिकेट टीम को कई यादगार जीत दिलाईं। सहवाग ने अपने करियर में ऐसे कई रिकॉर्ड बनाए, जिन्होंने उन्हें भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों की सूची में खास स्थान दिलाया।

अर्जुन पुरस्कार से पद्म श्री और आईसीसी हॉल ऑफ फेम तक का सफर

क्रिकेट में शानदार योगदान के लिए वीरेंद्र सहवाग को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें 2008 और 2009 में लगातार दो बार विजडन लीडिंग क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया। वर्ष 2010 में उन्हें आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर का सम्मान मिला।

भारत सरकार ने उन्हें 2002 में अर्जुन पुरस्कार और 2010 में पद्म श्री से सम्मानित किया। वहीं, वर्ष 2023 में उन्हें आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। अक्टूबर 2015 में सहवाग ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की थी।

क्रिकेट के मैदान पर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वीरेंद्र सहवाग का काशी में भक्ति भाव से दर्शन-पूजन करना अब चर्चा का विषय बना हुआ है। उनकी यह यात्रा खेल और आध्यात्मिकता के खूबसूरत संगम की झलक पेश करती है।

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