वाराणसी। धर्म और आस्था की नगरी काशी में धनतेरस के पावन अवसर पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी दरबार के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। वाराणसी स्थित अन्नपूर्णा मठ मंदिर में प्रथम तल पर विराजमान माता अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। धनतेरस से अन्नकूट तक चलने वाले पांच दिवसीय दर्शन मेले में करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस दौरान भक्तों को माता के दर्शन के साथ विशेष खजाना प्रसाद भी वितरित किया जा रहा है।
सुबह 4 बजे हुआ पूजन, 5 बजे भक्तों के लिए खुले कपाट
धनतेरस के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज ने षोडशोपचार विधि से माता अन्नपूर्णा का पूजन किया। इसके बाद विधि-विधान से महाआरती संपन्न हुई। महाआरती के बाद सुबह 5 बजे मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
कपाट खुलते ही माता के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु माता अन्नपूर्णा, माता लक्ष्मी और भूमि देवी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

पांच दिनों तक होंगे स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन
काशी में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी दरबार का दर्शन वर्ष में विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। धनतेरस से अन्नकूट तक चलने वाला यह पांच दिवसीय दर्शन उत्सव भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इन दिनों मंदिर में सुबह से लेकर दर्शन की अवधि तक श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना लगा रहता है।
माता अन्नपूर्णा को अन्न और पोषण की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा की कृपा से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। यही वजह है कि धनतेरस के अवसर पर काशी के इस मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
क्या है खजाना प्रसाद की मान्यता?
मां अन्नपूर्णा के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को लावा और खजाना प्रसाद वितरित किया जा रहा है। इस प्रसाद को लेकर भक्तों में विशेष आस्था है। मान्यता है कि धनतेरस पर माता के दरबार से मिलने वाले खजाना प्रसाद को घर ले जाने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अन्न-धन की कमी नहीं होती।
श्रद्धालु इस प्रसाद को माता का आशीर्वाद मानकर अपने घरों में सुरक्षित रखते हैं। कई भक्त इसे परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के बीच भी बांटते हैं। हालांकि, यह धार्मिक मान्यता और परंपरा का हिस्सा है।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम
पांच दिवसीय दर्शन मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए हैं। भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग लगाई गई है, ताकि दर्शन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं। धनतेरस से शुरू हुआ यह विशेष दर्शन उत्सव अन्नकूट तक चलेगा। इन पांच दिनों में काशी में मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन और खजाना प्रसाद प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
