नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक हैं। पौराणिक कथाओं में उनके जन्म और महिषासुर के वध का विशेष उल्लेख मिलता है। लेकिन आखिर मां कात्यायनी की उत्पत्ति कैसे हुई और उन्हें यह नाम क्यों दिया गया? आइए जानते हैं इस रोचक पौराणिक कथा के बारे में।
महिषासुर के अत्याचार से क्यों परेशान थे देवता?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर नामक शक्तिशाली असुर ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त किया था, जिसके कारण वह स्वयं को अजेय समझने लगा। शक्ति के मद में चूर महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया। उसके अत्याचारों से तीनों लोकों में भय का वातावरण बन गया।
महिषासुर के आतंक से परेशान होकर सभी देवताओं ने भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव से सहायता की प्रार्थना की। इसके बाद देवताओं की संयुक्त दिव्य ऊर्जा से एक तेजस्वी देवी का प्राकट्य हुआ, जिन्हें महिषासुर का अंत करने के लिए शक्ति प्रदान की गई।

महर्षि कात्यायन की तपस्या से जुड़ी है देवी की उत्पत्ति
एक अन्य प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन मां भगवती के परम भक्त थे। उन्होंने देवी को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में अवतार लिया।
महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में प्रकट होने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। मान्यता है कि देवी ने अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट होकर महिषासुर के विनाश का संकल्प लिया और देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।
सिंह पर सवार होकर मां ने किया महिषासुर का वध
धार्मिक कथाओं के अनुसार, मां कात्यायनी सिंह पर सवार होकर युद्धभूमि में पहुंचीं। देवताओं ने उन्हें विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। इसके बाद देवी और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ।
कथा के मुताबिक, महिषासुर ने युद्ध के दौरान कई रूप धारण किए, लेकिन देवी की शक्ति के सामने उसकी एक न चली। अंततः मां कात्यायनी ने उसका वध कर दिया। इसी कारण देवी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। यह कथा अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देती है।
मां कात्यायनी की पूजा का क्या है महत्व?
नवरात्रि के छठे दिन श्रद्धालु मां कात्यायनी की पूजा करके सुख, समृद्धि, साहस और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अविवाहित कन्याएं सुयोग्य जीवनसाथी की कामना से भी मां कात्यायनी की आराधना करती हैं।
मां का स्वरूप भक्तों को निर्भय होकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। नवरात्रि में उनकी पूजा के साथ यह संदेश भी जुड़ा है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी साहस, विश्वास और दृढ़ संकल्प से विजय प्राप्त की जा सकती है।
मां कात्यायनी का मंत्र:
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
नवरात्रि के पावन अवसर पर मां कात्यायनी की आराधना श्रद्धालुओं के लिए आस्था, शक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है।
