World longest river cruise: ‘गंगा विलास’ 15 विदेशी मेहमानों संग 28 अक्टूबर को पहुंचेगा काशी

वाराणसी: धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता की नगरी काशी एक बार फिर विदेशी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। भारत में निर्मित दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज ‘गंगा विलास’ 15 विदेशी यात्रियों को लेकर 28 अक्टूबर को वाराणसी पहुंचेगा। यूरोपीय देशों से आए इन यात्रियों को काशी की धार्मिक विरासत, ऐतिहासिक स्थलों और गंगा की सांस्कृतिक महत्ता से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इस यात्रा से वाराणसी के पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कोलकाता से शुरू हुआ सफर, पटना पहुंचा क्रूज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंगा विलास क्रूज 12 अक्टूबर को कोलकाता से रवाना हुआ था। यात्रा के दौरान यह मंगलवार शाम पटना पहुंचा, जहां इसे मल्टीमॉडल टर्मिनल के समीप मितन घाट पर ठहराया गया। इसके बाद क्रूज यात्रियों को लेकर काशी के लिए रवाना हो चुका है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 28 अक्टूबर को इसके वाराणसी पहुंचने की संभावना है।

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के निदेशक अरविंद कुमार के अनुसार, राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर यात्री और मालवाहक जहाजों का परिचालन बढ़ रहा है। गंगा विलास क्रूज इससे पहले जनवरी 2023 में 36 विदेशी यात्रियों के साथ रामनगर स्थित मल्टीमॉडल टर्मिनल पहुंचा था। अब दूसरी बार इसके काशी आने से क्षेत्र में नदी पर्यटन की संभावनाओं को लेकर उत्साह है।

पांच सितारा होटल जैसी सुविधाओं से लैस है गंगा विलास

गंगा विलास क्रूज को यात्रियों के आराम और पर्यटन अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें पांच सितारा होटल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्रूज पर लगभग 50 यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है। इसके अलावा आधुनिक जिम, रेस्टोरेंट और छत से गंगा के किनारे के मनोरम दृश्यों का आनंद लेने की सुविधा भी मौजूद है।

क्रूज की यात्रा के दौरान पर्यटकों को नदी के रास्ते भारत की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर मिलता है। यही विशेषताएं इसे अंतरराष्ट्रीय नदी पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल करती हैं।

गंगा आरती और काशी विश्वनाथ के करेंगे दर्शन

वाराणसी पहुंचने के बाद विदेशी पर्यटकों के कार्यक्रम में गंगा आरती में शामिल होना और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करना प्रमुख रूप से शामिल है। इसके साथ ही यात्री बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध सारनाथ का भ्रमण करेंगे। यहां वे भगवान बुद्ध से जुड़ी परंपराओं और प्राचीन स्मारकों के महत्व को जान सकेंगे।

पर्यटकों के कार्यक्रम में चुनार किले का दौरा भी शामिल है। ऐतिहासिक महत्व रखने वाला यह किला क्षेत्र की स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करता है। काशी से वापसी के दौरान यात्रियों का दल बिहार के सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण करेगा।

गंगा विलास ने बनाया था लंबी नदी यात्रा का रिकॉर्ड

गंगा विलास इससे पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बांग्लादेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी नदी यात्रा के कारण चर्चा में रहा है। अपनी पिछली चर्चित यात्रा में इसने लगभग 3,200 किलोमीटर की दूरी तय की थी और इसे दुनिया की सबसे लंबी नदी क्रूज यात्राओं में शामिल किया गया था।

हालांकि, नदी पर्यटन की सफलता जलस्तर और नौवहन की परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है। अगस्त में विदेशी यात्रियों को लेकर कोलकाता से रवाना हुआ राजमहल क्रूज गंगा में जलस्तर अधिक होने के कारण भागलपुर से वापस लौट गया था।

गंगा विलास का प्रस्तावित काशी आगमन एक बार फिर वाराणसी की आध्यात्मिक पहचान, ऐतिहासिक धरोहर और नदी पर्यटन की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करेगा।

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