BHU में फॉरेंसिक दंत चिकित्सा पर कार्यशाला, दांतों से उम्र और व्यक्ति की पहचान करने की तकनीक पर हुआ मंथन

वाराणसी, 24 अक्टूबर 2026। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के दंत चिकित्सा संकाय में नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (NAMS), नई दिल्ली के सहयोग से सतत दंत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (CDE) एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें फॉरेंसिक दंत चिकित्सा के माध्यम से दांतों को किसी व्यक्ति की आयु निर्धारित करने और उसकी पहचान स्थापित करने में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने की तकनीकों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का विषय ‘फॉरेंसिक ओडोंटोलॉजी: दांतों का समय और पहचान के साक्ष्य के रूप में प्रयोग’ था।

उद्घाटन सत्र में वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व पर जोर

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में दंत चिकित्सा संकाय के प्रमुख एवं डीन प्रो. अतुल भटनागर ने आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई दी। मुख्य अतिथि बीएचयू की कार्यकारिणी परिषद के सदस्य डॉ. यू.पी. शाही ने फॉरेंसिक दंत चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दांतों से प्राप्त साक्ष्यों का वैज्ञानिक उपयोग विभिन्न मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को दंत चिकित्सकों के ज्ञान और व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाने के लिए उपयोगी बताया।

चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS), बीएचयू के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने दांतों को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखने और फॉरेंसिक विज्ञान में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया।

दांतों से उम्र का पता लगाने की तकनीक पर चर्चा

कार्यक्रम के संयोजक एवं आईएमएस स्थित NAMS सेल के संयोजक प्रो. टी.पी. चतुर्वेदी ने वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने फॉरेंसिक दंत चिकित्सा के विभिन्न आयामों और उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी।

कार्यक्रम में मौलाना आजाद डेंटल कॉलेज, नई दिल्ली के प्रो. जयासीलन अगस्टिन और डॉ. सुरेंद्रनाथ बसु ने प्रमुख वक्ता के रूप में भाग लिया। दोनों विशेषज्ञों ने छोटे बच्चों, किशोरों, नवयुवाओं और वयस्कों की आयु का आकलन करने में दांतों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि दंत संरचना और उसके विकास से संबंधित जानकारियां आयु निर्धारण की प्रक्रिया में उपयोगी हो सकती हैं।

फॉरेंसिक जांच में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का प्रशिक्षण

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में पूर्व फॉरेंसिक विशेषज्ञ रह चुके और वर्तमान में गोवा स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. अर्जुन कुंडू ने दंत चिकित्सकों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दंत चिकित्सा के दौरान प्राप्त साक्ष्यों और संबंधित अभिलेखों को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखना क्यों आवश्यक है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका उचित उपयोग किया जा सके।

इसके बाद आयोजित व्यावहारिक कार्यशाला में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को लैपटॉप के माध्यम से विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कराया। NAMS के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार, कार्यशाला से पहले और बाद में प्रतिभागियों से प्रश्नावली भरवाई गई, ताकि कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान और उसके प्रभाव का आकलन किया जा सके।

CBCT और एक्स-रे तकनीक की भी दी गई जानकारी

दंत चिकित्सा संकाय के प्रो. अदित श्रीवास्तव ने कोन बीम कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CBCT) और एक्स-रे के माध्यम से किसी व्यक्ति अथवा कंकाल की आयु का अनुमान लगाने से संबंधित जानकारी साझा की। आधुनिक इमेजिंग तकनीकों के उपयोग से फॉरेंसिक जांच में सहायता मिलने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में प्रो. राहुल अग्रवाल, प्रो. नरेश शर्मा, प्रो. नवीन कुमार, प्रो. रमेश सोनी, प्रो. विपुल शर्मा, प्रो. सरिता परिहार और डॉ. महेश खैरनार सहित अन्य शिक्षक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे। आयोजन सचिव डॉ. अखिलेश चंद्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस कार्यशाला का उद्देश्य दंत चिकित्सकों को फॉरेंसिक दंत चिकित्सा की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना और वैज्ञानिक साक्ष्यों के संरक्षण एवं उपयोग के प्रति उनकी दक्षता बढ़ाना रहा।

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