वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के चित्रकला विभाग के टेक्सटाइल डिजाइन अनुभाग में छह दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘डिज़ाइन प्रोसेस’ का शुभारंभ 5 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10 बजे हुआ। SRIIC द्वारा वित्तपोषित इस कार्यशाला में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कुल 76 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को डिजाइन की मूल अवधारणा से लेकर उसके व्यावहारिक और रचनात्मक विकास तक की पूरी प्रक्रिया से परिचित कराना है।
कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि किसी डिजाइन की कल्पना किस प्रकार विकसित होती है और उसे व्यावहारिक रूप देते हुए अंतिम उत्पाद तक कैसे पहुंचाया जाता है। बदलते टेक्सटाइल डिजाइन उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला में रचनात्मक सोच, नवाचार और व्यावहारिक कौशल पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कार्यशाला के प्रशिक्षक श्री श्याम शर्मा हैं, जिन्हें टेक्सटाइल डिजाइन उद्योग में लगभग 17 वर्षों का व्यावसायिक अनुभव प्राप्त है। अपने लंबे औद्योगिक अनुभव और व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से वे प्रतिभागियों को डिजाइन प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराएंगे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को डिजाइन की अवधारणा, उसके विकास, रचनात्मक प्रयोग तथा उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा।

आयोजकों के अनुसार, यह कार्यशाला केवल डिजाइन की तकनीकी प्रक्रिया सीखने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य प्रतिभागियों में रचनात्मक दृष्टिकोण, नवाचार की क्षमता और समस्या समाधान की सोच विकसित करना भी है। साथ ही, विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान और टेक्सटाइल डिजाइन उद्योग की वास्तविक जरूरतों के बीच संबंध समझने में मदद मिलेगी।
कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ समन्वयक एवं संकाय प्रमुख डॉ. जस्मिंदर कौर के प्रेरणादायी उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यशाला का अधिकतम लाभ उठाने और डिजाइन के क्षेत्र में नए प्रयोगों के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान को डिजाइन शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए प्रतिभागियों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रोत्साहित किया।
वहीं, कार्यशाला की आयोजिका डॉ. किरन गुप्ता ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वर्तमान समय में डिजाइन प्रक्रिया की बढ़ती प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए बताया कि आज के प्रतिस्पर्धी टेक्सटाइल उद्योग में केवल पारंपरिक डिजाइन ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बाजार की जरूरतों, नवीन तकनीकों, उपभोक्ता पसंद और रचनात्मक सोच को समझना भी उतना ही आवश्यक है।
छह दिनों तक चलने वाली यह राष्ट्रीय कार्यशाला प्रतिभागियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगी। विभिन्न क्षेत्रों से आए 76 प्रतिभागियों की सहभागिता इसे राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं रचनात्मक आयोजन बना रही है। उम्मीद है कि कार्यशाला से प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को भविष्य में टेक्सटाइल डिजाइन के क्षेत्र में नए प्रयोग और नवाचार करने के लिए प्रेरित करेगा।
