BHU के डॉ. मनोज वर्मा की दोहरी उपलब्धि, वियतनाम में देंगे प्लेनरी व्याख्यान; शिमला में तीन साल करेंगे शोध

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर (वरिष्ठ वेतनमान) डॉ. मनोज कुमार वर्मा ने अकादमिक और शोध के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्हें वियतनाम में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय शोध सम्मेलन में प्लेनरी स्पीकर के रूप में आमंत्रित किया गया है। वहीं, उनका चयन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की प्रतिष्ठित टीचर्स एसोसिएटशिप के लिए भी हुआ है। डॉ. वर्मा की इन उपलब्धियों से बीएचयू के समाजशास्त्र विभाग में खुशी का माहौल है।

वियतनाम में डिजिटल असमानता पर देंगे व्याख्यान

डॉ. मनोज कुमार वर्मा 1 से 4 नवंबर 2026 तक वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में आयोजित होने वाले छठे इंडो ग्लोबल मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च कॉन्फ्रेंस (IGMRC-2026) में प्लेनरी व्याख्यान देंगे। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन इंटरनेशनल बेनेवोलेंट रिसर्च फाउंडेशन (IBRF), कोलकाता की ओर से विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से किया जा रहा है।

सम्मेलन में डॉ. वर्मा “Digital Inequality and Educational Opportunities Among University Students: Examining Digital Access, Usage and Learning Outcomes” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत करेंगे। उनका शोध-पत्र समीक्षा प्रक्रिया के बाद सम्मेलन के लिए स्वीकार किया गया है।

उनका शोध विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के बीच डिजिटल संसाधनों तक पहुंच, तकनीक के इस्तेमाल और उसके शैक्षणिक परिणामों में मौजूद असमानताओं पर केंद्रित है। डिजिटल माध्यमों का उच्च शिक्षा में बढ़ता प्रभाव देखते हुए यह विषय समान अवसर, डिजिटल समावेशन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

UGC की प्रतिष्ठित टीचर्स एसोसिएटशिप के लिए चयन

डॉ. वर्मा का चयन भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (IIAS), शिमला में संचालित UGC के अंतर-विश्वविद्यालय मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान केंद्र (IUC) की प्रतिष्ठित टीचर्स एसोसिएटशिप के लिए भी हुआ है।

BHU

इस एसोसिएटशिप के तहत डॉ. वर्मा वर्ष 2027, 2028 और 2029 के दौरान निर्धारित अवधि में शिमला स्थित संस्थान में रहकर अपना शोध कार्य करेंगे। इस दौरान उन्हें संस्थान के समृद्ध पुस्तकालय और अकादमिक संसाधनों का उपयोग करने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। योजना के तहत नियमानुसार यात्रा और रखरखाव संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

सामाजिक मुद्दों पर शोध में सक्रिय

डॉ. मनोज कुमार वर्मा समाजशास्त्र के अध्यापन और शोध के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में सामाजिक बहिष्करण, हाशियाकरण, ग्रामीण विकास, शोध पद्धति, डिजिटल असमानता और सामाजिक समावेशन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। वे विद्यार्थियों और शोधार्थियों के मार्गदर्शन के साथ विभिन्न अकादमिक गतिविधियों में भी सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

डॉ. वर्मा की एक साथ हासिल हुई इन दोनों उपलब्धियों को बीएचयू के लिए महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि माना जा रहा है। एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्हें भारत और बीएचयू का शोध प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर शिमला में तीन वर्षों तक शोध करने से उनके अकादमिक कार्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उन्हें बधाई देते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

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