वाराणसी, 23 अक्टूबर 2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के दृश्य कला संकाय की पूर्व संकाय प्रमुख, प्रख्यात समकालीन कलाकार और वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. उत्तमा दीक्षित अंतरराष्ट्रीय कला जगत में भारतीय कला और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर पहुंचने जा रही हैं। वह 2 नवंबर 2026 को जर्मनी की राजधानी बर्लिन स्थित प्रतिष्ठित टैगोर सेंटर में अपनी शोधपरक एकल कला प्रदर्शनी ‘द फॉरेस्ट सीरीज’ (The Forest Series) प्रस्तुत करेंगी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से कला, प्रकृति, जैव विविधता और पारिस्थितिक स्थिरता के बीच गहरे संबंधों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
प्रो. दीक्षित की यह प्रस्तुति भारतीय समकालीन कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के साथ पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों पर संवाद का अवसर भी प्रदान करेगी।
वन संरक्षण और जैव विविधता पर केंद्रित है प्रदर्शनी
प्रो. उत्तमा दीक्षित पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति का प्रमुख विषय बना रही हैं। उनकी ‘द फॉरेस्ट सीरीज’ वनों की अंधाधुंध कटाई, जैव विविधता के संरक्षण और प्रकृति तथा मानव जीवन के पारस्परिक संबंधों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है।
यह कला श्रृंखला मध्य भारत के घने जंगलों की जैव विविधता और आदिवासी लोक कलाओं में मौजूद प्रतीकों, परंपराओं तथा सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से प्रेरित है। इन विषयों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत कर कलाकार प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं।
प्रदर्शनी का प्रमुख संदेश यह है कि प्रकृति की सुंदरता केवल कलाकृतियों में दिखाई देने वाला दृश्य नहीं, बल्कि ऐसा प्राकृतिक धरोहर है जिसकी रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कला, पर्यावरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संगम
बर्लिन में प्रस्तावित आयोजन के दौरान प्रो. दीक्षित कला, पर्यावरण और पारिस्थितिक स्थिरता के अंतर्संबंधों पर व्याख्यान भी देंगी। इसके बाद वह दर्शकों के सामने सजीव चित्रांकन प्रस्तुत करेंगी। इस दौरान उपस्थित लोगों को रंगों और ब्रश के माध्यम से उनकी रचनात्मक प्रक्रिया को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
यह प्रस्तुति कला के माध्यम से पर्यावरणीय मुद्दों को समझने और उन पर विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करने का प्रयास होगी। साथ ही, भारतीय कलात्मक परंपराओं और समकालीन रचनात्मक दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा।
तीन दशकों का कला और शिक्षण अनुभव
लगभग तीन दशकों की कला-साधना और शैक्षणिक अनुभव से समृद्ध प्रो. उत्तमा दीक्षित ने भारतीय लोक कला, सांस्कृतिक परंपराओं और समकालीन कलात्मक अभिव्यक्तियों के क्षेत्र में योगदान दिया है। काशी की लोक चित्रकला पर आधारित उनकी पुस्तक और बार्सिलोना, फ्लोरेंस, मैगलंग इंस्टीट्यूट, नेपाल तथा वियना में प्राप्त अंतरराष्ट्रीय अनुभवों ने उनकी कला-दृष्टि को व्यापक आयाम प्रदान किए हैं।
काशी की कला को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
प्रो. दीक्षित की बर्लिन यात्रा काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भारतीय समकालीन कला की संभावनाओं को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर है। उनकी यह पहल दृश्य कला के विद्यार्थियों, युवा कलाकारों और शोधकर्ताओं को कला, पर्यावरण तथा अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संवाद की संभावनाओं से परिचित कराने में सहायक हो सकती है।
‘द फॉरेस्ट सीरीज’ के माध्यम से कला और पर्यावरण संरक्षण के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया जाएगा कि रचनात्मक अभिव्यक्ति सामाजिक और पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
