BHU Kathak Workshop: पांच दिनों तक विद्यार्थियों ने सीखे कथक के गुर, समापन पर गुरुजनों की खास प्रस्तुति

BHU Kathak Workshop: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के संगीत एवं मंच कला संकाय के नृत्य विभाग में बनारस घराने पर आधारित कथक नृत्य की पांच दिवसीय कार्यशाला का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कार्यशाला के दौरान सीखी गई कथक की तकनीकों, पारंपरिक रचनाओं और कलात्मक बारीकियों को मंच पर प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं, कथक के प्रख्यात गुरु पंडित माता प्रसाद मिश्र और पंडित रविशंकर मिश्र की मनमोहक युगल प्रस्तुति समारोह का मुख्य आकर्षण रही।

कथक की बारीकियों से रूबरू हुए विद्यार्थी

पांच दिनों तक चली इस कार्यशाला में कथक के दोनों प्रतिष्ठित गुरुजनों ने विद्यार्थियों को बनारस घराने की समृद्ध परंपरा, विशिष्ट सौंदर्यबोध और कलात्मक अभिव्यक्तियों से परिचित कराया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को कथक की पारंपरिक तकनीकों, लयात्मकता, भाव-भंगिमाओं और विभिन्न नृत्य रचनाओं की बारीकियां समझने का अवसर मिला।

कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल नृत्य की तकनीकी जानकारी देना ही नहीं, बल्कि बनारस घराने की विशिष्ट पहचान और उसकी सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ना रहा।

विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने बटोरीं तालियां

समापन समारोह का आयोजन पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में किया गया। यहां नृत्य विभाग के स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यशाला में अर्जित ज्ञान और अनुभव को मंच पर साकार किया।

विद्यार्थियों ने दोनों गुरुजनों से सीखी गई तकनीकों, कथक की पारंपरिक रचनाओं और लयात्मक बारीकियों का सुंदर प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुतियों में अभ्यास, अनुशासन और भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति समर्पण की झलक देखने को मिली। दर्शकों ने भी विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की।

गुरुजनों की युगल प्रस्तुति बनी समारोह का खास आकर्षण

समारोह में सबसे खास पल तब आया, जब पंडित माता प्रसाद मिश्र और पंडित रविशंकर मिश्र ने अपनी युगल नृत्य प्रस्तुति दी। दोनों गुरुजनों की प्रस्तुति में बनारस घराने की समृद्ध कलात्मक परंपरा, सहज लालित्य, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और अद्भुत लयात्मक कौशल का अनूठा संगम देखने को मिला।

उनकी प्रस्तुति ने कथक के पारंपरिक सौंदर्य और बनारस घराने की विशिष्ट शैली को जीवंत कर दिया। इस दौरान उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध नजर आए। गुरुजनों की इस प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को भी शास्त्रीय नृत्य की गहराई और उसकी परंपरागत विशेषताओं को करीब से समझने का अवसर दिया।

कुलसचिव राजन श्रीवास्तव रहे मुख्य अतिथि

कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा संगीत एवं मंच कला संकाय के संकायाध्यक्ष-प्रभारी प्रो. राजेश शाह, नृत्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. दीपान्विता सिंघा रॉय, प्रो. प्रवीण उद्धव, प्रो. प्रेम किशोर मिश्र, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. चंदन विश्वकर्मा, डॉ. खिलेश्वरी पटेल और डॉ. शुभंकर डे सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने की पहल

इस कार्यशाला ने विद्यार्थियों को कथक नृत्य की परंपरागत विरासत, कलात्मक विशेषताओं और गुरुजनों के अनुभवों से सीखने का व्यापक अवसर प्रदान किया। आयोजन में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को भी रेखांकित किया गया। विश्वविद्यालय की वर्तमान शैक्षणिक व्यवस्था के अंतर्गत ऐसे आयोजनों के माध्यम से विशिष्ट कलाओं के ज्ञान और शिक्षण-अधिगम की निरंतरता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यशाला का संयोजन नृत्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. दीपान्विता सिंघा रॉय ने किया, जबकि सह-संयोजन की जिम्मेदारी डॉ. रंजना उपाध्याय ने निभाई। यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय कलाओं की परंपरा और ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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