वाराणसी: श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर की प्राचीन संरचना को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। मंदिर के प्राचीन पत्थरों के क्षरण की वजह जानने और उनके संरक्षण के उपाय तलाशने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास की विशेषज्ञ टीम 5 नवंबर को वाराणसी पहुंचेगी। टीम आधुनिक तकनीकी उपकरणों की मदद से पत्थरों की स्थिति का परीक्षण करेगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर पत्थरों को सुरक्षित रखने और टूटे हुए स्वर्ण मंडित शिखर को दोबारा स्थापित करने की योजना तैयार की जाएगी।
अप्रैल में टूटकर गिरा था स्वर्ण मंडित शिखर का हिस्सा
काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य कोण पर स्थापित स्वर्ण मंडित शिखर का एक हिस्सा अप्रैल में टूटकर नीचे गिर गया था। इस घटना के बाद मंदिर की प्राचीन संरचना की मजबूती और पत्थरों के क्षरण को लेकर चिंता बढ़ गई थी। प्रारंभिक आशंकाओं में बंदरों की उछल-कूद और समय के साथ पत्थरों के कमजोर होने की संभावना जताई गई थी।
शिखर से टूटकर गिरे हिस्से को मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रूप से लॉकर में रखवा दिया था। इसके बाद मंदिर की ऐतिहासिक संरचना को संभावित नुकसान से बचाने और क्षरण के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों से तकनीकी जांच कराने की पहल की गई।

IIT मद्रास के स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विभाग को मिली जिम्मेदारी
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम के अनुसार, मंदिर के प्राचीन पत्थरों पर सोने की परत चढ़ाई गई है। आशंका है कि लंबे समय से मौसम में होने वाले बदलाव, बारिश और अन्य पर्यावरणीय प्रभावों के कारण पत्थरों का क्षरण हो रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक वजह स्पष्ट करने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच आवश्यक है।
इससे पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बीएचयू से तकनीकी परीक्षण के लिए संपर्क किया गया था। लेकिन स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आने के बाद IIT मद्रास के स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
पहले भी मंदिर का निरीक्षण कर चुकी है विशेषज्ञ टीम
IIT मद्रास की विशेषज्ञ टीम 27 और 28 मई को भी काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची थी। उस दौरान प्रारंभिक परीक्षण किया गया था। इसके बाद मंदिर के पत्थरों की स्थिति और क्षरण की प्रकृति को समझने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण कराने का सुझाव दिया गया।
इस कार्य के लिए 3 सितंबर को संस्थान को 18 लाख रुपये का भुगतान किया गया। अब 5 नवंबर को डॉ. अरुण मेनन के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम मंदिर की संरचना का परीक्षण करेगी। जांच में प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर आगे की संरक्षण योजना तैयार की जाएगी।
नौ साल बाद दोबारा हो रहा संरचना का तकनीकी आकलन
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र ने बताया कि वर्ष 2017 में IIT रुड़की की टीम ने भी मंदिर के पत्थरों का सर्वेक्षण किया था। करीब नौ साल बाद संरचना की स्थिति में संभावित बदलावों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
इस बार की जांच का मुख्य उद्देश्य पत्थरों के क्षरण के कारणों की पहचान करना, प्राचीन संरचना की मौजूदा स्थिति का आकलन करना और भविष्य में होने वाले नुकसान को रोकने के प्रभावी उपाय निर्धारित करना है।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी संरक्षण की रणनीति
IIT मद्रास की टीम की जांच रिपोर्ट मंदिर के प्राचीन पत्थरों के संरक्षण और टूटे हुए स्वर्ण मंडित शिखर की पुनर्स्थापना के लिए महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि पत्थरों को और अधिक क्षरण से बचाने के लिए कौन-से तकनीकी उपाय अपनाए जाएं और शिखर को दोबारा स्थापित करने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई जाए।
काशी विश्वनाथ मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व भी रखता है। ऐसे में इसकी प्राचीन संरचना का वैज्ञानिक आकलन और उचित संरक्षण मंदिर की विरासत को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।
