6 किमी के दायरे में तेंदुए का आतंक! 45 हजार लोग दहशत में, ऑनलाइन हुई पढ़ाई

वाराणसी: छावनी (कैंटोमेंट) क्षेत्र में पिछले छह दिनों से तेंदुए की मौजूदगी की खबरों ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। करीब छह किलोमीटर के दायरे में करीब 45 हजार की आबादी दहशत है। छावनी समेत नदेसर, राजा बाजार, वरुणा ब्रिज, भोजूबीर समेत 10 क्षेत्रों के लोगों में तेंदुए को लेकर खौफ है।

कैंटोमेंट क्षेत्र शहर का अति-संवेदनशील और प्रमुख इलाका माना जाता है, जहां डीएम, पुलिस कमिश्नर सहित कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के आवास हैं। साथ ही, इसी क्षेत्र में कई स्टार-रेटेड होटल हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों विदेशी और घरेलू पर्यटकों का आवागमन रहता है। तेंदुए के खौफ का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है।

सेंट मैरीज कॉन्वेंट स्कूल, जहां बीते बृहस्पतिवार को तेंदुआ दिखा था, उसे एहतियातन बंद कर कक्षाएं ऑनलाइन मोड पर चलाई जा रही हैं। यहां तक कि शिक्षकों को भी स्कूल में जाने से मना किया गया है।

फुटप्रिंट खोज रही टीम

वन विभाग ने वन्यजीव की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। इलाके में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और ट्रैप कैमरों के माध्यम से चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है, लेकिन अब तक तेंदुए की सीधी मौजूदगी का कोई पुख्ता प्रमाण या फुटेज हाथ नहीं लगा है।

सोमवार देर रात तक टेक्निकल ग्राउंड के आसपास वन्यजीव दिखाई देने की चर्चाओं से हड़कंप मचा रहा, लेकिन मौके पर पहुंचे बचाव दल को किसी जानवर की मौजूदगी की पुष्टि करने वाला कोई साक्ष्य नहीं मिला। इससे पहले 39 जीटीसी सैन्य परिसर में भी सघन तलाशी अभियान चलाया गया था। डीएफओ के अनुसार, कैमरों और जमीन पर की गई छानबीन में केवल कुत्तों के पंजों के निशान पाए गए हैं। इसके बावजूद विभाग ने सुरक्षा के तौर पर परिसर में पिंजरा लगाया है और अगले 10 दिनों तक लगातार निगरानी रखने का निर्णय लिया है।

स्थानीय नागरिकों में रोष और भय

वन विभाग की ओर से स्पष्ट निष्कर्ष न निकल पाने के कारण स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का आरोप है कि वन विभाग का अभियान केवल मुख्य रास्तों और चुनिंदा परिसरों तक सीमित है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बंगला नंबर 42, 43, 54 और 61 के आसपास स्थित घनी झाड़ियों की सुध नहीं ली गई है, जबकि वन्यजीव के छिपने के लिए ये स्थान सबसे मुफीद हैं। ठोस जानकारी और प्रभावी कार्रवाई के अभाव में छावनी क्षेत्र में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है।

कागज नहीं दिखा सके लीला आयोजक, वन विभाग कार्रवाई में अक्षम

रामनगर में हाथी द्वारा महावत की मौत के बाद भी वन विभाग किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर सका है। विभाग के ओर से हाथी के प्रयोग पर पाबंदी लगाई गई है। जिसके कारण रविवार को अंतिम दिन बिना हाथी के लीला हुई। वहीं इसके विपरीत रामलीला आयोजक हाथी के प्रयोग से संबंधित किसी प्रकार के अनुमति का लिखित आदेश वन विभाग के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके हैं।

वन विभाग जंगली जानवर की खोज में लगातार सर्च अभियान चला रहा है। टीमों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है। सीसीटीवी और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। रामनगर में रामलीला आयोजकों को पुन: हाथी के प्रयोग की अनुमति के लिए पत्र लिखा जाएगा। – निधि चौहान, डीएफओ।

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