94 दिनों से हाथों के बल चल रहा बाबा का भक्त! प्रयागराज से जल लेकर काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक का अनोखा संकल्प

वाराणसी। आस्था और भक्ति के रास्ते पर चलने वाले श्रद्धालु अपने आराध्य के प्रति समर्पण दिखाने के लिए कई अनोखे संकल्प लेते हैं। ऐसा ही एक अनूठा उदाहरण उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा निवासी अशोक उर्फ मन्नू सोनी पेश कर रहे हैं। बाबा काशी विश्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए मन्नू सोनी प्रयागराज से जल लेकर दोनों हाथों के बल चलते हुए काशी की ओर बढ़ रहे हैं। उनकी यह कठिन यात्रा 94 दिनों से जारी है। शुक्रवार की शाम वह वाराणसी के रूपापुर पहुंचे, जहां उन्हें इस अनोखे अंदाज में यात्रा करते देखकर राहगीर भी हैरान रह गए।

बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक का लिया संकल्प

अशोक उर्फ मन्नू सोनी मूल रूप से बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र के निवासी हैं। उनके मन में बाबा काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करने की भावना जागी। इसी श्रद्धा के साथ उन्होंने प्रयागराज से जल लेकर काशी तक की यात्रा हाथों के बल पूरी करने का संकल्प लिया।

आमतौर पर श्रद्धालु पैदल चलकर या कांवड़ लेकर अपने आराध्य के दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन मन्नू सोनी ने अपनी यात्रा के लिए बेहद कठिन तरीका चुना। वह पैरों को ऊपर रखते हुए दोनों हाथों के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। इस तरह लगातार यात्रा करना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उनका संकल्प लगातार चर्चा का विषय बन रहा है।

94 दिनों से जारी है अनोखी यात्रा

मन्नू सोनी की यह यात्रा अब 94वें दिन में पहुंच चुकी है। प्रयागराज से जल लेकर निकले मन्नू रास्ते में आगे बढ़ते हुए वाराणसी जिले में प्रवेश कर चुके हैं। कछवां रोड पार करने के बाद वह शुक्रवार की शाम रूपापुर पहुंचे।

हाथों के बल चलते हुए हाईवे और रास्तों पर आगे बढ़ते मन्नू को देखकर राहगीरों के कदम ठहर जा रहे हैं। लोग उनकी यात्रा को कौतूहल से देखते हैं और उनके संकल्प के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। उनका यह असाधारण प्रयास लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

आस्था के साथ जुड़ी है कठिन शारीरिक परीक्षा

दोनों हाथों के सहारे शरीर का पूरा भार संभालकर आगे बढ़ना आसान नहीं है। इस तरह की यात्रा में हाथों, कंधों और शरीर के अन्य हिस्सों पर लगातार दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा करने के लिए शारीरिक क्षमता, धैर्य और सावधानी की जरूरत होती है।

मन्नू सोनी का यह संकल्प उनकी धार्मिक आस्था और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। हालांकि, यात्रा की कठिनाइयों के बीच सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। विशेषकर हाईवे पर चलते समय यातायात और सड़क की परिस्थितियां जोखिम पैदा कर सकती हैं।

अब काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने का इंतजार

प्रयागराज से शुरू हुई मन्नू सोनी की यात्रा अब वाराणसी तक पहुंच चुकी है। उनका उद्देश्य बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में पहुंचकर साथ लाए जल से जलाभिषेक करना है। फिलहाल, उनके मंदिर पहुंचने की निश्चित तारीख और यात्रा पूरी होने के समय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

काशी की धार्मिक परंपराओं और बाबा विश्वनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के बीच मन्नू सोनी का यह प्रयास लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। उनकी 94 दिनों से जारी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि श्रद्धालु अपने विश्वास को व्यक्त करने के लिए कितने कठिन रास्ते चुन सकते हैं।

अब लोगों को इंतजार है कि मन्नू सोनी कब बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचकर अपना संकल्प पूरा करेंगे और प्रयागराज से लाए जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।

निष्कर्ष: बलिया के मन्नू सोनी की हाथों के बल यात्रा आस्था, धैर्य और संकल्प की एक अनोखी मिसाल बनकर सामने आई है। प्रयागराज से काशी तक की उनकी इस यात्रा पर अब स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की नजरें टिकी हैं।

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