13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने अगले कदम का ऐलान कर दिया है. IAS से इस्तीफा देने के बाद अब उन्होंने राजनीति में आने के संकेत दिए हैं. एक वीडियो संदेश के जरिए दिव्या मित्तल ने कहा कि वह राजनीति में उतरेंगी और इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से करेंगी. उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं, बल्कि लोगों के साथ राजनीति करेंगी.
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि IAS से इस्तीफा देने के बाद उनके सामने कई सवाल थे. कुछ दिनों तक उन्होंने इन सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन अब उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर स्थिति साफ कर दी है. उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का फैसला लोगों की आवाज बनने के लिए लिया है.
‘आगे क्या? राजनीति’
दिव्या मित्तल ने कहा, “अभी कुछ दिन पहले मैंने IAS से त्यागपत्र दिया और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए. कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया क्योंकि काम बड़ा था और मैं हौसला जुटा रही थी. पर आज उन सवालों के जवाब देने आई हूँ. आगे क्या, किसके साथ और कहाँ से? पहला सवाल, आगे क्या? राजनीति.”
उन्होंने राजनीति में आने की वजह बताते हुए कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती या पहुंचने के बाद भी सुनी नहीं जाती.
उन्होंने कहा “लोगों ने मुझे कहा कि तुम सब कुछ तो बन गईं, अब और क्या बनना है? मुझे आवाज बनना है. उन लोगों की आवाज, जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती. और उन लोगों की तरफ से मुझे अपने देश की आज़ादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए.”
किसी दल के साथ नहीं, लोगों के साथ राजनीति
दिव्या मित्तल ने साफ किया कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ राजनीति शुरू नहीं करेंगी. उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति लोगों के साथ होगी. इसके साथ ही उन्होंने इस्तीफे के बाद अपने खिलाफ लगाए गए एक आरोप का भी जिक्र किया.
उन्होंने कहा “मैं राजनीति करूंगी किसी दल के साथ नहीं, केवल आपके साथ, केवल लोगों के साथ. पर होगा कैसे? राजनीति तो शरीफ लोगों के लिए है ही नहीं और इसका जवाब मुझे अपने इस्तीफे के चंद घंटों में मिल गया. जहां बहुत सारे आम लोगों ने मेरा समर्थन किया, वहीं एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने लिखा कि मैं रात के अंधेरे में एक दूसरी बड़ी पार्टी के बड़े नेता से मिली थी.”
उन्होंने आगे कहा “वो मुलाकात कभी नहीं हुई थी. ये बात लिखने वाले को भी पता थी, परंतु उद्देश्य सच लिखना नहीं था. उद्देश्य था कि एक औरत, जो सवाल पूछने निकली है, उसको पहले ही दिन डरा दो. यही तो ये लोग करते हैं. किसी को FIR करके डरा दो, किसी को ट्रोल करके बिठा दो, ताकि आम आदमी और अच्छे लोग राजनीति में न आएँ और इनकी ऐसे ही राजनीति चलती रहे.”
‘मैं डरूँगी नहीं, मैं सवाल ही पूछूँगी’
पूर्व आईएएस अधिकारी ने कहा कि वह इस तरह के दबाव से पीछे नहीं हटेंगी. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश लोगों के लिए ऐसा मंच तैयार करने की होगी, जो डर के बिना अपनी बात रख सके.
उन्होंने कहा “हमें इसी को बदलना है. इसलिए मैं डरूँगी नहीं, मैं सवाल ही पूछूँगी, ताकि इस देश की हर छोटी बच्ची अपने मन की बात कह सके और उसे रात के अंधेरे का डर न दिखाया जा सके. जिन लोगों ने उस दिन मेरा समर्थन किया था, उन्हीं लोगों के साथ एक ऐसा मंच बनाएँगे, जो इनसे डरेगा नहीं. डरेगा तो केवल इस देश के भविष्य के लिए.”
पैसा, बाहुबल और जाति-धर्म के समीकरण पर क्या बोलीं?
दिव्या मित्तल ने राजनीति में चुनाव लड़ने की चुनौती का जिक्र करते हुए पैसा, बाहुबल और जाति-धर्म के समीकरण को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उनके पास इन तीनों में से कुछ भी नहीं है, लेकिन वह राजनीति के इस तरीके को बदलना चाहती हैं.

उन्होंने कहा “सवाल ये भी है कि डर नहीं है, ठीक है, लेकिन पैसा भी तो नहीं है, बाहुबल भी तो नहीं है, जाति-धर्म का समीकरण भी तो नहीं है. तीनों बातें सही हैं. पर अब ये बताइए कि जो पैसा चुनाव में बहाया जाता है, वो कहाँ से आता है? वो हमारी सड़क से आता है, हमारे पुल से आता है, हमारे स्कूल से आता है. मुझे वो पैसा नहीं बहाना, मुझे वो सड़क ही चाहिए.”
बाहुबल को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें जनता पर दबाव बनाने वाली ताकत नहीं चाहिए, बल्कि लोगों से बनी ऐसी शक्ति चाहिए जो लोगों के लिए काम करे. उन्होंने कहा “ये बाहुबल जो जनता के ऊपर दिखाया जाता है, मुझे वो बाहुबल नहीं चाहिए. मुझे लोगों से बनी हुई वो शक्ति चाहिए, जो लोगों के लिए हो और लोगों की ही हो. जाति-धर्म का समीकरण इसलिए नहीं है, क्योंकि मैंने कभी बैठाया नहीं. जब मैं अधिकारी थी तो न्याय करने से पहले मैंने कभी किसी का नाम नहीं पूछा. राजनीति में भी नहीं पूछूँगी.”
उत्तर प्रदेश से शुरू होगी राजनीतिक पारी
दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत के लिए उत्तर प्रदेश को चुना है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी ने उन्हें उनकी पहचान समझने में मदद की और यहां के लोगों ने उन्हें अपनाया.
उन्होंने कहा “80 सालों तक इन्होंने समीकरण ही तो बिठाए और साथ में देश भी बैठा रह गया. इस तरह की राजनीति कैसे शुरू होगी, कैसे खड़ी होगी और कैसे चलेगी, ये हम लोग साथ मिलकर तय करेंगे. अब तीसरा सवाल, कहाँ से? मैं यहाँ अफसर बनकर आई थी, पर यहाँ के लोगों ने मुझे अपनी बेटी बना लिया. सिर पर हाथ रखा, घर का खाना खिलाया और जब थकी तो संभाला.”
उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि राजनीति की शुरुआत भी यहीं से होगी. उन्होंने कहा “गुरु वो होता है, जो हमें हमसे मिलवा दे. यहाँ की मिट्टी ने मुझे सिखाया कि मैं कौन हूँ और किसके लिए हूँ. उत्तर प्रदेश की मिट्टी ही मेरी कर्मभूमि है और इसीलिए शुरुआत यहीं से, उत्तर प्रदेश से. मैं जानती हूँ कि हमें क्या बताया गया है कि इस देश में कुछ नहीं बदलता और खास तौर पर उत्तर प्रदेश में तो बिल्कुल नहीं.”
देश और उत्तर प्रदेश को लेकर क्या कहा?
अपने संदेश के आखिरी हिस्से में दिव्या मित्तल ने देश के लोकतंत्र और उत्तर प्रदेश की भूमिका का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उन्हें उस सोच पर भरोसा नहीं है जो मानती है कि देश में कुछ नहीं बदल सकता.
उन्होंने कहा “लेकिन मैं उस देश को नहीं जानती. मैं उस देश को जानती हूँ, जिसे कहा गया था कि आज़ादी के बाद टुकड़ों में बँट जाएगा और मेरा देश आज भी खड़ा है. जिसे कहा गया था कि वो भूखा मरेगा और हमने उगाकर दिखाया. जिसे कहा गया था कि इतने गरीब देश में लोकतंत्र कैसे चलेगा और एक अरब लोगों के देश में लोकतंत्र आज भी चल रहा है.”
उन्होंने आगे कहा “मैं उस देश को जानती हूँ और उत्तर प्रदेश ने तो हमेशा राह दिखाई है. आज़ादी की चिंगारी सबसे पहली बार उत्तर प्रदेश से ही शुरू हुई और आज भी जनपद दर जनपद मैंने देखा है कि लोग सही के साथ जुड़ते हैं और जो काम अफसर भी नहीं कर पाते, वो लोग करके दिखाते हैं.”
