वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर (RGSC) में उद्यमिता, तकनीकी नवाचार और सतत स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन दिवसीय व्यावसायिक विकास कार्यक्रम (PDP) शुरू हुआ। 12 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 14 अक्टूबर तक चलेगा। इसका आयोजन बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (IM) के एमबीए (एग्रीबिजनेस) विभाग की ओर से किया जा रहा है।
‘Entrepreneurship, Technological Innovation and Sustainable Startup Ecosystem (From Ideas to Impact)’ विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों में उद्यमशील सोच विकसित करना, तकनीकी नवाचार की समझ बढ़ाना और नए स्टार्टअप स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने विचारों को व्यावहारिक, प्रभावी और टिकाऊ व्यवसाय में बदलने की दिशा में मार्गदर्शन दिया जाएगा।

युवाओं से नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने वाला बनने की अपील
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW), वाराणसी के उप महाप्रबंधक श्री सागर ने औद्योगिक क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी दक्षता और उद्यमशील सोच की बढ़ती आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहने, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले और समस्याओं का समाधान निकालने वाले उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि बीएचयू के संयुक्त कुलसचिव (लेखा-I) डॉ. संजय कुमार ने स्टार्टअप और उद्यमिता के विकास में संस्थागत सहयोग तथा वित्तीय सहायता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने युवाओं से उपलब्ध अवसरों और सहायता तंत्र का प्रभावी उपयोग करने की अपील की।
कृषि और तकनीक में नवाचार की अपार संभावनाएं
आरजीएससी, बीएचयू के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. बी. एम. एन. कुमार ने कृषि, तकनीक, उद्यमिता और सतत विकास के क्षेत्रों में परिसर की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान और संसाधन नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा नए उद्यम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, बीएचयू के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी ने विद्यार्थियों में उद्यमशील मानसिकता, नवाचार क्षमता और समस्या-समाधान कौशल विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को नवाचार और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
वहीं, संस्थान के डीन एवं विभागाध्यक्ष प्रो. एस. के. दुबे ने अंतर्विषयी शिक्षा, आपसी सहयोग और तकनीकी नवाचार के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने ऐसे व्यावसायिक मॉडल विकसित करने पर जोर दिया, जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य होने के साथ सामाजिक रूप से जिम्मेदार और पर्यावरण के अनुकूल भी हों।

विचार से बाजार तक पहुंचने की सीख
कार्यक्रम के कार्यशाला एवं पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. अभिजीत सिंह ने इसके उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य फोकस विचार उत्पन्न करने से लेकर नवाचार, उद्यमिता, व्यावसायीकरण और सतत प्रभाव पैदा करने तक की पूरी प्रक्रिया से प्रतिभागियों को परिचित कराना है।
इस कार्यक्रम में कुल 82 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें स्नातक एवं परास्नातक विद्यार्थी, शोधार्थी और विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से जुड़े शिक्षक शामिल हैं। अलग-अलग विषयों के प्रतिभागियों की भागीदारी से कार्यक्रम को अंतर्विषयी स्वरूप मिला है।
उद्घाटन सत्र के अंत में कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. राजीव कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों, आयोजन समिति और स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में आयोजन समिति के सदस्य प्रो. आशीष सिंह, प्रो. सुभाष प्रताप सिंह, डॉ. त्रिभुवन नाथ, डॉ. दीपिका कौर और डॉ. आशीष कुमार गौतम भी उपस्थित रहे।
14 अक्टूबर तक होंगे विशेषज्ञ सत्र
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान उद्यमिता, तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप इकोसिस्टम, टिकाऊ व्यावसायिक मॉडल और ‘आइडियाज टू इम्पैक्ट’ की अवधारणा पर विशेषज्ञ सत्र एवं संवाद आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को नए विचारों पर चर्चा करने, विशेषज्ञों से सीखने और उभरते उद्यमशील अवसरों को समझने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य युवाओं को विचारों को नवाचार में, नवाचार को उद्यमिता में और उद्यमिता को टिकाऊ सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव में बदलने के लिए प्रेरित करना है।
