प्रवक्ता संस्कृत भर्ती पर बड़ा अपडेट: आचार्य उपाधिधारकों का रास्ता साफ, शासन ने दूर किया भ्रम

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से आचार्य (संस्कृत) की उपाधि प्राप्त अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि विश्वविद्यालय से प्राप्त आचार्य (संस्कृत) उपाधि स्नातकोत्तर उपाधि (Post Graduate Degree) है। ऐसे अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी विज्ञापन संख्या 06/2026 के तहत प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। शासन की इस स्पष्टता के बाद अभ्यर्थियों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है।

माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-5 की ओर से उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज को भेजे गए पत्र में आचार्य (संस्कृत) उपाधि की स्थिति स्पष्ट की गई है। शासन ने कहा है कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से निर्गत आचार्य (संस्कृत) विषय की उपाधि स्नातकोत्तर उपाधि है और इस योग्यता वाले अभ्यर्थियों को प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन करने में कोई कठिनाई नहीं है।

कुलपति ने उठाया था मामला

दरअसल, प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए हाल ही में जारी भर्ती विज्ञापन में निर्धारित शैक्षिक योग्यता को लेकर आचार्य उपाधिधारक अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। इस विषय को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) बिहारी लाल शर्मा ने गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष और माध्यमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया।

कुलपति ने इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय से भी संवाद स्थापित कर आचार्य उपाधिधारी विद्यार्थियों के हितों और उनके भविष्य से जुड़े इस विषय की जानकारी दी। इसके बाद शासन स्तर पर मामले की जांच और स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया तेज हुई।

मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से हुआ समाधान

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में मामला आते ही विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए त्वरित कार्रवाई की गई। शासन की ओर से जारी स्पष्टीकरण के बाद अब आचार्य (संस्कृत) उपाधिधारी अभ्यर्थियों के लिए प्रवक्ता पद पर आवेदन का रास्ता पूरी तरह स्पष्ट हो गया है।

कुलपति ने कहा कि विज्ञापन में उत्पन्न स्थिति किसी नीतिगत निर्णय या संस्कृत विषय की उपेक्षा का परिणाम नहीं थी, बल्कि मुख्य रूप से भाषा अथवा कार्यालयीय शब्दावली से जुड़ी भ्रांति के कारण असमंजस पैदा हुआ था।

अभ्यर्थियों से आवेदन करने की अपील

कुलपति ने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य (संस्कृत) उपाधि प्राप्त सभी पात्र अभ्यर्थियों से अपील की है कि शासन के स्पष्टीकरण के बाद वे किसी प्रकार के भ्रम में न रहें। यदि वे विज्ञापन में निर्धारित अन्य आवश्यक शर्तों को पूरा करते हैं, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन करें।

उन्होंने कहा कि शासन का यह स्पष्टीकरण वर्तमान भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ विश्वविद्यालय की आचार्य (संस्कृत) उपाधि के स्नातकोत्तर स्वरूप को लेकर भी महत्वपूर्ण है।

संस्कृत शिक्षा के हित में विश्वविद्यालय रहेगा सक्रिय

प्रो. शर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के शैक्षिक अधिकार, अकादमिक सम्मान और रोजगार के अवसरों की रक्षा करना विश्वविद्यालय का दायित्व है।

कुलपति ने विश्वविद्यालय के आचार्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों, वर्तमान एवं पूर्व विद्यार्थियों तथा संस्कृत-जगत से जुड़े लोगों से अपील की कि शासन के इस स्पष्टीकरण की जानकारी अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों तक पहुंचाएं, ताकि कोई भी योग्य अभ्यर्थी भ्रम के कारण आवेदन के अवसर से वंचित न हो।

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