वाराणसी, 3 अक्टूबर 2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व विधि संकाय प्रमुख और प्रख्यात संवैधानिक कानून विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) जी.पी. वर्मा का 1 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। पिछले एक सप्ताह से उनका उपचार बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय में चल रहा था। उनके निधन से शिक्षा और विधि जगत में शोक की लहर है।
प्रो. वर्मा की अंतिम यात्रा 2 अक्टूबर को वाराणसी स्थित शिवम कॉम्पलेक्स, लंका स्थित उनके निवास से निकली। हरिश्चन्द्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र अभिषेक वर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उनका त्रयोदशाह शिवम कॉम्पलेक्स, लंका स्थित निवास से होगा।
पांच दशक से अधिक का रहा विशिष्ट सेवाकाल
प्रो. जी.पी. वर्मा ने अपने जीवन के पांच दशकों से अधिक लंबे सेवाकाल में बीएचयू और देश के विधि एवं शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विश्वविद्यालय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे चिकित्सा विज्ञान संस्थान में विधिक प्रमुख के पद पर भी सेवाएं दे चुके थे।
बीएचयू से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक और शैक्षणिक दायित्वों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न कुलपतियों की शासी समितियों के सदस्य के रूप में भी कार्य किया। अपने व्यापक अनुभव और विधि के क्षेत्र में विशेषज्ञता के कारण विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं कानूनी गतिविधियों में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता रहा।

संवैधानिक कानून के रहे विशेषज्ञ
प्रो. वर्मा को संवैधानिक कानून के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता था। विधि के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता केवल बीएचयू तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
वे नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू), लखनऊ के संस्थापक कुलपति रहे। इसके अलावा वे भारत सरकार के मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष भी रहे। इन जिम्मेदारियों के माध्यम से उन्होंने उच्च शिक्षा, कानून और मानवाधिकार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिवार में पत्नी, पुत्र और पुत्री
प्रो. जी.पी. वर्मा के परिवार में उनकी पत्नी, लंदन में रह रहे एक पुत्र और दिल्ली में रह रही एक पुत्री हैं। उनके निधन से परिवार, बीएचयू से जुड़े शिक्षकों, विद्यार्थियों और विधि जगत से जुड़े लोगों में शोक है। पांच दशक से अधिक समय तक शिक्षा, कानून और प्रशासन से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने वाले प्रो. वर्मा का योगदान उनके लंबे सार्वजनिक एवं शैक्षणिक सेवाकाल के लिए याद किया जाएगा।
