Kashiram Death Anniversary: आखिर बैठकों के लिए BSP ने क्यों तय की थी ₹12,000 की रकम?

Kashiram

Kashiram Death Anniversary: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के संस्थापक और आजाद भारत में दलितों को जागरूक कर उन्हें राजनीतिक दिलाने वाले सबसे बड़े नेता कांशीराम की 9 अक्टूबर को पुण्यतिथि है. कांशीराम के मूवमेंट से जुड़ी उनकी एक शर्त काफी अचंभित करने वाली है. इस शर्त में कांशीराम किसी के बुलावे पर वह रैली करने के लिए तभी जाते थे जब वहां कम से कम लोगों से मांगकर 12 हजार रुपये का चंदा इकट्ठा किया जाता था. पहली नजर में यह बात कितनी हैरतअंगेज लगती है कि एक नेता जो दलितों के लिए लड़ाई लड़ रहा था उसे रुपयों की क्या जरूरत थी. तो इस आइए इस शर्त के पीछे की असली वजह क्या थी, इसे समझने जानते हैं.

कांशीराम ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर दलितों को मूवमेंट से जोड़ने की शुरुआत की थी. शुरुआत में वह तमाम फैक्ट्रियों, सरकारी विभागों, तमाम दफ्तरों में जाकर वहां काम करने वाले दलितों और पिछड़ों को अपने साथ जोड़ते थे. एक समय उनके साथ दो लाख से ज्यादा दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के नौकरीपेशा लोग जुड़ चुके थे. नौकरी में होने के चलते ये सार्वजिनक रूप से मूवमेंट के लिए नहीं काम कर पाते थे.

कांशीराम ने यूं बनाई DS4

6 दिसंबर 1981 के दिन कांशीराम ने डीएस4 यानी दलित, शोषित समाज संघर्ष समिति का गठन किया. इसमें सरकारी कर्मचारी, क्षत्रिय, ब्राह्मण और बनिया को सदस्य नहीं बनाया जाता था. इन्हें छोड़कर कोई भी सालाना 3 रुपये देकर कोई भी मेंबर बन सकता था. डीएस4 का मशहूर नारा था ‘तिलक, तराजू और तलवार, जूते मारो इनको चार’. यह नारा पूरी तरह से ब्राह्मण, क्षत्रिय और बनिया समुदाय को संबोधित करने वाला था.


डीएस4 के एक्टिविस्ट अपनी साइकिल पर नीला झंडा लगाकर पूरे देश की यात्रा करते थे. कांशीराम मानते थे कि बहुजन समाज के नेताओं को केवल साइकिल जैसे छोटे वाहन का ही प्रयोग करना चाहिए. हरियाणा विधानसभा चुनाव में DS4 करीब केवल एक फीसदी वोट मिलने के बाद कांशीराम ने 1983 और 84 में एक बड़ी साइकिल रैली ऑर्गेनाइज की.

कांशीराम ने 5 बड़ी साइकिल रैलियां कीं-:

15 मार्च 1984 के दिन यह सभी साइकिल रैलियां दिल्ली के बोट क्लब मैदान में आकर मिलीं. जब ये सारी साइकिल रैलियां बोट क्लब जाने के लिए दिल्ली के लाल किला मैदान में एकत्र हुईं तो सब लोग हैरान रह जाते हैं. पत्रकारों ने दलित एवं पिछड़ी जातियों की इतनी बड़ी रैली पहले कभी कवर नहीं की थी. कांशीराम की रैली अखबारों में छा गई.


अब देश के अलग-अलग जगहों से कांशीराम को भाषण देने के लिए आमंत्रण आने लगे. कांशीराम इन रैलियों में जाने के लिए कुछ शर्तें रखते थे-:

  1. जनसभा या मीटिंग स्थल के 5 किलोमीटर के दायरे में कोई फोर व्हीलर वाहन नहीं होगा.
  2. कांशीराम के वजन के बराबर चंदा के जरिए एक बैग में 12000 रुपये जमा होने चाहिए.
  3. जनसभा या मीटिंग में कम से कम 12000 श्रोता होने चाहिए.
  4. 12000 श्रोताओं में कम से कम 3000 साइकिल राइडर्स होने चाहिए.

कांशीराम की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी थी कि उनकी सारी शर्तें मान ली जाती थीं. इस तरह कांशीराम ने अकेले उत्तर प्रदेश में ही करीब 100 मीटिंग्स को संबोधित किया था. अब जैसे-जैसे उनकी डिमांड बढ़ती जा रही थी, वह हर दिन करीब तीन मीटिंग्स को एड्रेस करने लगे. इस तरह वह हर दिन कम से कम 36,000 लोगों को संबोधित कर रहे थे. इसी बहाने पार्टी के लिए हर दिन 36,000 रुपये जुटाए जा रहे थे.

कांशीराम ने 2 साल बाद इस पैसे को और भी बढ़ाया और सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही वह 47 लाख रुपये जुटाने में सफल रहे. इस तरह 14 अप्रैल 1984 के दिन यानी डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन पर कांशीराम बोट क्लब न्यू दिल्ली में एक नई पार्टी का ऐलान करते हैं और इस नई पार्टी का नाम रखते हैं बहुजन समाज पार्टी यानी बीएसपी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *