BHU में नवजात शिशुओं की गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान पर जोर, HELP प्रोजेक्ट लॉन्च

वाराणसी, 17 अक्टूबर 2026। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) स्थित बाल रोग विभाग के नियोनेटोलॉजी प्रभाग की ओर से उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं की निगरानी और शुरुआती उपचार पर CME-सह-कार्यशाला आयोजित की गई। सर सुंदरलाल अस्पताल के डॉक्टर्स लाउंज में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान HELP (Help to Evaluate & Live to Full Potential) प्रोजेक्ट का शुभारंभ भी किया गया। कार्यक्रम को नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (NNF) इंडिया, KIMS Health CSR और NNF वाराणसी का सहयोग मिला।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण NICU, बाल रोग विभाग, IMS-BHU द्वारा तैयार पुस्तक “Follow-up of High-Risk Neonates by Neonatal Intensive Care Unit” का विमोचन रहा। कार्यशाला में नवजात शिशुओं की समयबद्ध जांच, अस्पताल से छुट्टी के बाद नियमित फॉलो-अप और शुरुआती हस्तक्षेप की उपयोगिता पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।

नवजात मृत्यु दर कम करने पर जोर

BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने देश में नवजात मृत्यु दर में राज्यों के बीच व्यापक अंतर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि IMS-BHU में नवजात मृत्यु दर का आकलन कर सुधार के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि संस्थान क्षेत्र में नवजात देखभाल का आदर्श केंद्र बन सके। उन्होंने सर सुंदरलाल अस्पताल की व्यापक जनसेवा की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर के बाहर आसपास के समुदायों में भी स्वास्थ्य जागरूकता और चिकित्सा कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। स्थानीय स्तर पर उपचार योग्य स्थितियों का नजदीक ही प्रबंधन किया जा सके और जटिल मामलों को विश्वविद्यालय रेफर किया जाए।

चिकित्सा विज्ञान संस्थान के डीन (मॉडर्न मेडिसिन) प्रो. संजय गुप्ता ने उच्च जोखिम वाले नवजातों में समस्याओं की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार और नियमित निगरानी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज्म और विकासात्मक विलंब जैसी स्थितियों में शुरुआती संकेत पहचानने तथा उचित देखभाल देने पर जोर दिया।

सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत ने व्यवस्थित मूल्यांकन और समय पर निदान को बेहतर उपचार परिणामों के लिए आवश्यक बताया। वहीं, डीन (रिसर्च) प्रो. मनोज पांडे ने दुर्लभ आनुवंशिक एवं मेटाबॉलिक बीमारियों की पहचान में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि HELP प्रोजेक्ट बाल रोग विशेषज्ञों और नियोनेटोलॉजिस्ट को संदिग्ध मामलों की पहचान में मार्गदर्शन देगा। उन्होंने दुर्लभ बीमारियों की वास्तविक व्यापकता समझने के लिए जनसंख्या-आधारित अध्ययनों की जरूरत भी बताई।

दुर्लभ बीमारियों की जांच में मिलेगी सहायता

NNF इंडिया के अध्यक्ष डॉ. ललन के. भारती ने पिछले तीन दशकों में नवजात शिशुओं के जीवित रहने की दर में भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने राज्यों के बीच मौजूद अंतर को कम करने के लिए सहयोग और कम लागत वाले प्रभावी उपायों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

KIMSHEALTH की CEO (CSR) सुश्री रेशमी आयशा ने स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में संस्थान की सामाजिक जिम्मेदारी पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि NNF–KIMS Health पहल के तहत अब तक 11 राज्यों के 90 मरीजों को सहायता मिली है।

पूर्व प्रोफेसर एवं NICU प्रभारी प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि कई आनुवंशिक और मेटाबॉलिक विकारों की पहचान समय पर नहीं हो पाती। उन्होंने नवजातों के मस्तिष्क के विकास और न्यूरोप्लास्टिसिटी का लाभ उठाने के लिए NICU देखभाल के महत्व पर प्रकाश डाला। KIMS Health, तिरुवनंतपुरम के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नवीन जैन ने दुर्लभ बीमारियों के लिए आनुवंशिक और मेटाबॉलिक जांच तथा विशेषज्ञ मार्गदर्शन की उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. अनु शर्मा ने बताया कि HELP प्रोजेक्ट के तहत 30 दिन से कम आयु के ऐसे नवजातों के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन और निःशुल्क जांच उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, जिनमें दुर्लभ आनुवंशिक या मेटाबॉलिक विकारों की आशंका हो। पात्र बच्चों को भारत सरकार की सहायता-प्राप्त उपचार योजनाओं तक पहुंच बनाने में भी मदद दी जाएगी।

बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. अंकुर सिंह ने स्वागत संबोधन में कहा कि कार्यशाला से स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के ज्ञान एवं कौशल को मजबूती मिलेगी। डॉ. दिव्या सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

कार्यशाला में बाल रोग विशेषज्ञों, नियोनेटोलॉजिस्ट, रेजिडेंट डॉक्टरों और NICU नर्सिंग अधिकारियों सहित 45 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सत्रों में NICU देखभाल, अस्पताल से छुट्टी के बाद फॉलो-अप और ऑक्यूपेशनल थेरेपी के माध्यम से शुरुआती हस्तक्षेप पर व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *