वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के एक युवा शोधार्थी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। कृषि विज्ञान संस्थान के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग में खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी विषय में पीएचडी कर रहे विशाल कुमार को जापान में आयोजित 16वें अंतरराष्ट्रीय खाद्य अध्ययन सम्मेलन में प्रतिष्ठित ‘इमर्जिंग स्कॉलर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और शोध जगत में खुशी का माहौल है।
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 10 से 12 अक्टूबर 2026 तक जापान के ओसाका विश्वविद्यालय स्थित सेंटर फॉर एजुकेशन इन लिबरल आर्ट्स एंड साइंस (CELAS) में आयोजित हुआ। इसका आयोजन कॉमन ग्राउंड रिसर्च नेटवर्क्स ने फूड स्टडीज़ रिसर्च नेटवर्क के सहयोग से किया। सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, चीन, अमेरिका, मलेशिया, सिंगापुर सहित दुनिया के विभिन्न देशों के शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

टिकाऊ खाद्य पैकेजिंग पर शोध को मिली पहचान
विशाल कुमार ने सम्मेलन में “खाद्य संरक्षण के लिए टिकाऊ पैकेजिंग सामग्री: रोज़ेला एंथोसाइनिन युक्त जैव-अपघटनीय रोगाणुरोधी κ-कैराजीनन/एचपीएमसी फ्रेश-चेक इंडिकेटर फिल्म” विषय पर मौखिक शोध-प्रस्तुति दी। उनके शोध का विषय खाद्य संरक्षण के लिए टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग सामग्री विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और पैकेजिंग से उत्पन्न पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना आज वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। जैव-अपघटनीय पैकेजिंग सामग्री और खाद्य गुणवत्ता के संकेतक इन चुनौतियों से निपटने में उपयोगी संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं। विशाल कुमार के शोध को मिला सम्मान खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रदान करता है।
खाद्य-योग्य कटलरी पर भी कर रहे हैं शोध
विशाल कुमार का शोध खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के अंतर्गत खाद्य-योग्य कटलरी के विकास और उसके वैज्ञानिक मूल्यांकन पर भी केंद्रित है। खाद्य-योग्य कटलरी ऐसे उत्पादों को कहा जाता है, जिन्हें इस्तेमाल के बाद खाया जा सकता है या उपयुक्त परिस्थितियों में जैव-अपघटित किया जा सकता है।
पारंपरिक एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के विकल्प तलाशने के प्रयासों के बीच इस क्षेत्र में शोध की उपयोगिता बढ़ रही है। ऐसे उत्पादों की मजबूती, नमी-प्रतिरोध, भंडारण स्थिरता, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक होता है। विशाल कुमार का शोध इसी दिशा में नए विकल्पों और संभावनाओं की पड़ताल करता है।
‘लिविंग विद वाटर: फूड एंड लाइफ’ रहा सम्मेलन का विषय
सम्मेलन का विशेष विषय ‘लिविंग विद वाटर: फूड एंड लाइफ’ था। इसके अंतर्गत जल संसाधनों, खाद्य उत्पादन, सतत विकास और मानव कल्याण के बीच संबंधों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने खाद्य प्रणालियों, पोषण, खाद्य प्रसंस्करण और पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए। सम्मेलन हाइब्रिड मोड में आयोजित हुआ, जिससे शोधकर्ताओं को प्रत्यक्ष और ऑनलाइन माध्यम से भाग लेने का अवसर मिला।

विभागाध्यक्ष और शोध-पर्यवेक्षक ने दी बधाई
बीएचयू के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आर. के. डुआरी ने विशाल कुमार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंच युवा शोधार्थियों को अपने विचार साझा करने, वैश्विक शोध समुदाय से सीखने और अपने अकादमिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाने का अवसर देते हैं।
विशाल कुमार के शोध-पर्यवेक्षक डॉ. अरविंद ने भी उन्हें ‘इमर्जिंग स्कॉलर अवॉर्ड’ मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने शोधार्थी की उपलब्धि को उनके शैक्षणिक विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन बताया और भविष्य में खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सार्थक योगदान देने की शुभकामनाएं दीं।
विशाल कुमार की यह उपलब्धि बीएचयू में हो रहे शोध कार्यों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। साथ ही, यह टिकाऊ खाद्य पैकेजिंग और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के विकास की दिशा में युवा शोधकर्ताओं की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।
