पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण को मिलेगी नई तकनीक, IIT-BHU और NHIDCL ने मिलाया हाथ

वाराणसी। देश के पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), वाराणसी (IIT-BHU) और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) ने महत्वपूर्ण पहल की है। दोनों संस्थानों के बीच राजमार्ग अवसंरचना के क्षेत्र में संयुक्त शोध, तकनीकी नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

यह समझौता 8 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित NHIDCL मुख्यालय में हुआ। इस अवसर पर NHIDCL के प्रबंध निदेशक डॉ. किशन कुमार (IAS), निदेशक (तकनीकी) अमरेंद्र कुमार, IIT-BHU के शोध एवं विकास अधिष्ठाता प्रो. राजेश कुमार और संस्थान में MoRTH चेयर प्रोफेसर प्रो. अंकित गुप्ता मौजूद रहे।

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण की चुनौतियों पर होगा शोध

समझौते के तहत दोनों संस्थान उन्नत राजमार्ग इंजीनियरिंग, ढलानों को स्थिर करने की तकनीक, टिकाऊ सड़क निर्माण सामग्री और सड़क नेटवर्क की रियल-टाइम निगरानी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। विशेष रूप से पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण के दौरान आने वाली भौगोलिक एवं तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजने पर जोर दिया जाएगा।

ढलानों के खिसकने और भूस्खलन जैसी समस्याओं से प्रभावित क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों पर शोध किया जाएगा। इसके साथ ही ऐसी सड़क निर्माण तकनीकों को विकसित करने की दिशा में भी काम होगा, जिनसे सड़कों की मजबूती और उनकी उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे।

छात्रों और इंजीनियरों को मिलेंगे नए अवसर

इस साझेदारी का उद्देश्य केवल शोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अकादमिक ज्ञान को वास्तविक परियोजनाओं में लागू करना भी होगा। इसके अंतर्गत संयुक्त शोध परियोजनाएं, तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।

इससे IIT-BHU के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को राजमार्ग निर्माण से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को समझने तथा उनके तकनीकी समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा। वहीं, क्षेत्र में काम कर रहे इंजीनियरों को भी आधुनिक तकनीकों और शोध के नवीन निष्कर्षों से लाभ मिल सकेगा।

NHIDCL की परियोजनाओं को मिलेगी तकनीकी विशेषज्ञता

समझौते के अनुसार, IIT-BHU राजमार्ग परियोजनाओं के लिए तकनीकी परामर्श, उन्नत निर्माण सामग्री का परीक्षण, संरचनात्मक ऑडिट और विशेषज्ञ सलाह भी उपलब्ध कराएगा। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता का आकलन करने, संभावित तकनीकी समस्याओं की पहचान करने और परियोजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

NHIDCL के प्रबंध निदेशक डॉ. किशन कुमार ने अकादमिक शोध और जमीनी स्तर पर उसके क्रियान्वयन के बीच की दूरी कम करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने टिकाऊ और मजबूत अवसंरचना के विकास के लिए शोध आधारित समाधानों की आवश्यकता को रेखांकित किया।

वहीं, IIT-BHU के शोध एवं विकास अधिष्ठाता प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि यह साझेदारी संस्थान में विकसित शोध को देश के सड़क परिवहन क्षेत्र की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ने में सहायक होगी। प्रो. अंकित गुप्ता ने भी इस सहयोग को पेवमेंट इंजीनियरिंग में नवाचार और राजमार्ग सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

टिकाऊ और सुरक्षित राजमार्ग नेटवर्क विकसित करने पर जोर

दोनों संस्थानों का लक्ष्य अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर देशभर में सुरक्षित, मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल राजमार्ग नेटवर्क के विकास में योगदान देना है। खासकर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में यह साझेदारी सड़क निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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