संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं. 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोग के शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए. एक सदी के सफर में UPSC की भर्ती प्रक्रिया और सिविल सर्विस में कई बदलाव देखने को मिले हैं. इनमें महिलाओं की भागीदारी में हुई बढ़ोतरी भी अहम है. आंकड़े बताते हैं कि समय के साथ सिविल सेवा में महिलाओं की हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव आया है.
कब हुई थी UPSC की स्थापना?
1 अक्टूबर 1926 को ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में पहले पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना हुई थी, जो आगे चलकर संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC के रूप में विकसित हुआ. पिछले 100 वर्षों में देश ने आजादी, आर्थिक विकास और सामाजिक बदलाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं. इस पूरी विकास यात्रा में UPSC की भूमिका भी अहम रही है. आयोग के जरिए चयनित अधिकारियों ने नीतियों को लागू करने, प्रशासन को मजबूत बनाने और देश के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
आयोग केंद्र सरकार की अलग-अलग सेवाओं और पदों के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है. UPSC ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर 1 अक्टूबर 2025 से 1 अक्टूबर 2026 तक कई कार्यक्रम आयोजित किए. 1 अक्टूबर को शताब्दी वर्ष के समापन समारोह का आयोजन किया जा रहा है.

1952 में सिर्फ तीन महिलाएं हुईं सफल
UPSC के आंकड़ों से पता चलता है कि सिविल सेवा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है. वर्ष 1952 में नियुक्ति के लिए कुल 83 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई थी. इनमें केवल तीन महिलाएं थीं. इस तरह उस समय सफल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 3.6 फीसदी थी.
CSE 2025 में 299 महिलाओं का चयन
समय के साथ सिविल सेवा में महिलाओं की हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव आया. CSE 2025 के रिजल्ट में नियुक्ति के लिए कुल 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई. इनमें 299 महिलाएं थीं. यानी सफल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 31.2 फीसदी रही. यह आंकड़ा 1952 के मुकाबले महिलाओं के प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव दिखाता है.
एक दशक में भी बढ़ी हिस्सेदारी
सरकार के अनुसार, करीब एक दशक पहले सिविल सेवा परीक्षा में सफल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी थी. अब यह आंकड़ा 30 फीसदी से ऊपर पहुंच चुका है. CSE 2025 में टॉप पांच सफल उम्मीदवारों में भी एक महिला शामिल रही. ये आंकड़े बताते हैं कि सिविल सेवा में महिलाओं की भागीदारी समय के साथ बढ़ी है.
