Anant Singh Vs Dularchand Yadav: कभी थे दोस्त, अब एक विवाद ने पहुंचा दिया जेल की दहलीज पर !

Anant Singh Vs Dularchand Yadav: मोकामा के विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गईं हैं. दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है. दुलारचंद यादव के परिजनों की ओर से हाईकोर्ट के जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने यह निर्देश दिया.

दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान मोकामा में मतदान से महज छह दिन पहले जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में उनके पोते नीरज कुमार ने पुलिस को आवेदन देकर अनंत सिंह, उनके दो भतीजों रणवीर सिंह और कर्मवीर सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था.

दुलारचंद यादव के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पहले उन्हें गोली मारी गई और फिर उनके ऊपर गाड़ी चढ़ा दी गई. इस हत्याकांड में अनंत सिंह को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी. अब इसी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

क्यों शुरू हुई थी अनंत सिंह और दुलारचंद यादव के बीच अदावत?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह और दुलारचंद यादव के बीच टकराव चर्चा का विषय बन गया था. दुलारचंद यादव मोकामा से जन सुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे थे. इस दौरान वह लगातार अनंत सिंह के खिलाफ बयान दे रहे थे.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान दोनों के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत स्तर पर तल्खी बढ़ती चली गई. दुलारचंद यादव की ओर से अनंत सिंह पर व्यक्तिगत टिप्पणियां किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया. इसके अलावा टाल क्षेत्र में दुलारचंद यादव का अपना राजनीतिक प्रभाव भी था. उनके इस प्रभाव के पीछे उनके पुराने आपराधिक इतिहास को भी एक वजह माना जाता रहा है.

वर्ष 2019 में पटना पुलिस ने दुलारचंद यादव को कुख्यात अपराधी बताते हुए गिरफ्तार किया था. उनके खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज थे.

जहां जन्मे, वहीं हुई दुलारचंद यादव की हत्या

दुलारचंद यादव का जन्म मोकामा के तारतर गांव में हुआ था और इसी गांव में उनकी हत्या कर दी गई. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से वह बाढ़ में रह रहे थे. विधानसभा चुनाव के दौरान जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने के लिए वह तारतर गांव पहुंचे थे. इसी दौरान उनकी हत्या की घटना हुई.

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, दुलारचंद यादव के खिलाफ पटना जिले के घोषवरी और बाढ़ थानों में कई मामले दर्ज थे. टाल क्षेत्र में उनकी पहचान एक प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में थी. 1980 और 1990 के दशक में इलाके की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में उनका खासा प्रभाव बताया जाता था. चुनाव के दौरान क्षेत्र में राजनीतिक दलों के कई बड़े नेता भी स्थानीय समीकरणों को साधने के लिए उनसे संपर्क करते थे.

आरजेडी के टिकट पर लड़ चुके थे विधानसभा चुनाव

दुलारचंद यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद वह समय-समय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़ते रहे और उनसे अलग भी होते रहे. कहा जाता है कि 90 के दशक में वे लालू प्रसाद के खास हुआ करते थे. लालू प्रसाद के मोकामा की सभा में वे उनके साथ मंच भी शेयर किया करते थे. लेकिन, बाद में उनका लालू प्रसाद से अनबन हो गया. फिर वे कई राजनीतिक दलों के साथ जुड़े.

एक समय ऐसा भी था, जब दुलारचंद यादव और अनंत सिंह के बीच अच्छे संबंध बताए जाते थे. हालांकि, वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में दुलारचंद यादव ने अनंत सिंह का साथ छोड़कर जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन करना शुरू कर दिया. इसके बाद वह लगातार सोशल मीडिया के जरिए अनंत सिंह के खिलाफ बयान देते रहे. चुनाव प्रचार के दौरान दोनों के बीच बढ़ती तल्खी ने मोकामा की राजनीति को गरमा दिया था. बाद में दुलारचंद यादव की हत्या के बाद यह विवाद एक बड़े राजनीतिक और कानूनी मामले में बदल गया.

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