वाराणसी: UP MLC Election में वाराणसी शिक्षक सीट से सपा के लाल बिहारी यादव ने एक बार फिर अपना परचम लहराया है। वह लगातार दूसरी बार इस सीट से जीतकर विधान परिषद पहुंचे हैं। इस बार उन्होंने 2020 की तुलना में पांच गुना ज्यादा वोटों से जीत हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय इलाके में सपा उम्मीदवार की जीत को एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
लाल बिहारी यादव ने बीजेपी उम्मीदवार प्रमोद मिश्र को करीब 4900 वोटों से जीत दर्ज की है। इससे पहले 2020 एमएलसी चुनाव में भी वह प्रमोद मिश्र को मात दे चुके हैं। तब प्रमोद मिश्र निर्दलीय उम्मीदवार हुआ करते थे। 6 साल पहले लाल बिहार यादव की जीत का अंतर 936 वोट था। लाल बिहारी यादव ने वित्तविहीन शिक्षकों के लिए संघर्ष शुरू करने से लेकर विधान परिषद में नेता विपक्ष तक का सफर तय किया। उन्होंने अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है।
शिक्षक राजनीति में बनाई पहचान
आजमगढ़ के विशुनपुर गांव में 1 जुलाई, 1960 को जन्मे लाल बिहारी यादव ने बीए और बीएड की शिक्षा ली। इसके बाद वह शिक्षा क्षेत्र से जुड़े और वित्तविहीन शिक्षकों और शिक्षक समुदाय के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे। इसी वजह से शिक्षक राजनीति में उनकी पहचान बनी।

2022 में बने नेता प्रतिपक्ष
पहली बार 2020 में सपा ने उनको वाराणसी शिक्षक सीट पर एमएलसी उम्मीदवार बनाया। जीत हासिल कर वह विधान परिषद पहुंचे। 2022 में सपा ने उनको विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाया। हालांकि आवश्यक संख्या खत्म होने के कारण यह पद समाप्त हो गया। 2024 में विधान परिषद में एक बार फिर सपा सदस्यों की संख्या बढ़ी तो लाल बिहारी यादव को दोबारा नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।
अखिलेश यादव को दिया जीत का श्रेय
वाराणसी शिक्षक सीट से दोबारा एमएलसी चुने जाने के बाद लाल बिहारी यादव ने कहा कि यह केवल एक चुनावी जीत नहीं बल्कि शिक्षकों की नाराजगी और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों पर समाजवादी पार्टी में जताए गए विश्वास की जीत है। उन्होंने अपनी जीत का श्रेय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को दिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने पुरानी पेंशन बहाली, मदरसों में शिक्षकों के मानदेय और वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय के मुद्दों को लगातार उठाया।
