Varanasi HIV Case: वाराणसी में एचआईवी संक्रमण के नए मामले चिंता बढ़ा रहे हैं. इस साल जनवरी से अक्तूबर तक करीब 900 लोगों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.इनमें बड़ी संख्या किशोरों और युवाओं की बताई जा रही है.असुरक्षित यौन संबंध, नशे के लिए एक ही सिरिंज का इस्तेमाल और असुरक्षित तरीके से टैटू बनवाना संक्रमण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं.आंकड़े बताते हैं कि जागरूकता और बचाव के उपायों को लेकर अभी भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है.
बीएचयू में 728, जिला अस्पताल में 175 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में जनवरी से सितंबर तक जांच के दौरान 728 लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई.वहीं, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में जांच कराने वाले 175 लोगों की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई.इस तरह दोनों अस्पतालों में कुल 903 मामले सामने आए हैं.हालांकि, ये आंकड़े अलग-अलग अस्पतालों में हुई जांच के हैं.इन्हें वाराणसी के केवल स्थानीय निवासियों का कुल आंकड़ा नहीं माना जा सकता.

बीएचयू में मिले वाराणसी के 150 संक्रमित
बीएचयू अस्पताल में एचआईवी संक्रमित पाए गए 728 लोगों में करीब 150 वाराणसी के रहने वाले हैं.बाकी मरीज जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, चंदौली, सोनभद्र और भदोही समेत पूर्वांचल के अन्य जिलों तथा बिहार के अलग-अलग इलाकों से आए थे.रिपोर्ट के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या किशोरों और युवाओं की है.ऐसे में कम उम्र में संक्रमण के खतरे और बचाव के तरीकों को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है.
एक ही सिरिंज से नशा लेना बढ़ा रहा संक्रमण का खतरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एचआईवी संक्रमण फैलने के प्रमुख कारणों में संक्रमित सुई या सिरिंज का साझा इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंध शामिल हैं.बिना उचित सुरक्षा के टैटू बनवाने में इस्तेमाल होने वाली दूषित सुई से भी संक्रमण का खतरा रहता है.जिला अस्पताल के ओएसटी सेंटर में पिछले दो वर्षों के दौरान ऐसे 30 लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई, जिन्होंने एक ही सिरिंज से नशीले पदार्थ लिए थे.इनमें दो महिलाओं की मौत हो चुकी है.बाकी मरीजों को नियमित दवा और काउंसिलिंग दी जा रही है.
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा
वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में एचआईवी और हेपेटाइटिस की जांच मुफ्त की जाती है.जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में औसतन 60 लोग जांच कराने पहुंचते हैं.स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की काउंसिलिंग करते हैं और रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आगे का इलाज शुरू किया जाता है.मरीजों को नियमित दवा उपलब्ध कराने के साथ उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर भी नजर रखी जाती है.
किशोरों और युवाओं की विशेष काउंसिलिंग
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष कुमार राय के अनुसार, जांच केंद्रों पर नियमित रूप से मुफ्त जांच की जाती है.इससे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट भी हर महीने तैयार की जाती है.संक्रमित लोगों की काउंसिलिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है. जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेम प्रकाश के मुताबिक, एचआईवी पॉजिटिव पाए गए लोगों की नियमित काउंसिलिंग की जा रही है.किशोरों और युवाओं को विशेष रूप से जागरूक किया जाता है.उन्हें नशे से दूर रहने, सुई या सिरिंज साझा नहीं करने और टैटू बनवाते समय संक्रमण से बचाव के सुरक्षित तरीकों को अपनाने की सलाह दी जाती है. एचआईवी से बचाव के लिए जागरूकता, समय पर जांच और नियमित इलाज अहम हैं.संक्रमित व्यक्ति के साथ भेदभाव करने के बजाय उसे सही जानकारी, चिकित्सा और भावनात्मक सहयोग देना भी जरूरी है.
