BHU में 75 विद्यार्थियों को मिला जीवनरक्षक कौशल प्रशिक्षण, CPR और स्ट्रोक की पहचान के बताए तरीके

वाराणसी, 23 अक्टूबर 2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र (Centre for Tourism and Hospitality Studies—CTHS) की ओर से नर्चरिंग लाइफ स्किल्स सेल (NLS) के सहयोग से जीवनरक्षक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पर्यटन विषय के लगभग 75 परास्नातक विद्यार्थियों और पीएचडी शोधार्थियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में करीब 35 छात्राएं शामिल थीं।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के प्रोत्साहन एवं प्रेरणा से आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम “Life Skills: Personal to Professional” कार्यशाला का हिस्सा था। प्रशिक्षण सत्र शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे से शाम 5 बजे तक मुंशी प्रेमचंद सभागार में आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर समय पर प्राथमिक सहायता देने के प्रति जागरूक बनाना था।

CPR और स्ट्रोक की पहचान पर विशेष जोर

प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR), हृदय संबंधी आपात स्थितियों, स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों तथा दुर्घटनाओं में त्वरित प्राथमिक सहायता के महत्व पर जानकारी दी। व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को जीवनरक्षक प्रक्रियाओं से परिचित कराया गया।

CPR एक महत्वपूर्ण आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसका उपयोग व्यक्ति के सामान्य रूप से सांस न लेने और प्रतिक्रिया न देने जैसी परिस्थितियों में किया जा सकता है। वहीं, स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानना और तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करना बेहद जरूरी है। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि आपातकालीन स्थिति में सही समय पर उचित कदम उठाना किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

IMS-BHU के विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण

कार्यक्रम में आयुर्विज्ञान संस्थान (IMS-BHU) के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रशिक्षण प्रदान किया। इनमें एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी मिश्रा, सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के प्रो. डॉ. शशि प्रकाश मिश्रा, सहायक प्रोफेसर डॉ. विपुल श्रीवास्तव और सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रखर जायसवाल शामिल रहे। डॉ. प्रखर जायसवाल सर सुंदरलाल चिकित्सालय एवं IMS-BHU के प्रॉक्टर भी हैं।

विशेषज्ञों ने आपातकालीन चिकित्सा परिस्थितियों में प्राथमिक सहायता, समय पर चिकित्सकीय मदद लेने और जीवनरक्षक प्रक्रियाओं के महत्व से संबंधित जानकारी साझा की। इस तरह के प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को आपात स्थितियों में अधिक जागरूक और जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।

पर्यटन के विद्यार्थियों के लिए क्यों जरूरी है प्रशिक्षण?

पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों को भविष्य में यात्रियों, पर्यटकों और विभिन्न समूहों के साथ काम करना पड़ सकता है। ऐसे में आपातकालीन परिस्थितियों की पहचान और प्राथमिक सहायता की जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है। किसी यात्रा, सार्वजनिक स्थल या पर्यटन गतिविधि के दौरान अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्या आने पर प्रशिक्षित व्यक्ति समय रहते सहायता बुलाने और उचित शुरुआती कदम उठाने में मदद कर सकता है।

कार्यक्रम का समन्वय पर्यटन अध्ययन की प्रोफेसर डॉ. शिखा मिश्रा ने किया। BHU की यह पहल विद्यार्थियों में जीवनरक्षक कौशल विकसित करने, आपातकालीन सहायता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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