वाराणसी, 15 अक्टूबर 2026। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के लिए गौरव का विषय है कि क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. बिक्रम कुमार गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में 10 से 14 अक्टूबर 2026 तक आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ESICM LIVES 2026 में वैज्ञानिक व्याख्यान प्रस्तुत कर गंभीर मरीजों के उपचार में एंटीबायोटिक के उचित इस्तेमाल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।
प्रो. गुप्ता ने अपने व्याख्यान में “Antimicrobial Stewardship and the Role of Biomarkers in Guiding Prescribing” विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने एंटीबायोटिक प्रतिरोध की बढ़ती वैश्विक चुनौती और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार में एंटीबायोटिक दवाओं का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
एंटीबायोटिक प्रतिरोध वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती
एंटीबायोटिक प्रतिरोध आज दुनिया भर की स्वास्थ्य प्रणालियों के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुका है। जब बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव को निष्प्रभावी करने लगते हैं, तो संक्रमण का इलाज कठिन हो सकता है। ऐसे में एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत के अनुसार और सही अवधि तक इस्तेमाल करना बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रो. गुप्ता ने अपने व्याख्यान में एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप यानी रोगाणुरोधी दवाओं के जिम्मेदार और तर्कसंगत उपयोग की अवधारणा को रेखांकित किया। इसका उद्देश्य मरीजों को प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ अनावश्यक एंटीबायोटिक इस्तेमाल को कम करना और दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित होने के जोखिम को सीमित करना है।

बायोमार्कर्स से उपचार संबंधी फैसलों में मिल सकती है मदद
व्याख्यान का एक प्रमुख पहलू प्रोकैल्सीटोनिन (PCT) जैसे बायोमार्कर्स की भूमिका रहा। बायोमार्कर्स ऐसे जैविक संकेतक होते हैं, जिनकी सहायता से शरीर में संक्रमण और अन्य चिकित्सकीय स्थितियों का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
प्रो. गुप्ता ने बताया कि प्रोकैल्सीटोनिन जैसे संकेतकों का उपयोग मरीज की नैदानिक स्थिति और अन्य जांच परिणामों के साथ करके एंटीबायोटिक उपचार से जुड़े फैसलों को बेहतर बनाया जा सकता है। उचित परिस्थितियों में इनकी मदद से उपचार की अवधि कम करने और अनावश्यक एंटीबायोटिक उपयोग रोकने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि, ऐसे बायोमार्कर्स का उपयोग मरीज की पूरी चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है। गंभीर मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय मूल्यांकन और अन्य जांचों का महत्व भी बना रहता है।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय विशेषज्ञों की भागीदारी
ESICM LIVES 2026 में भारत के अन्य विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया। इनमें इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (ISCCM) के अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह त्यागी भी शामिल रहे। सम्मेलन में प्रो. गुप्ता की वैज्ञानिक भागीदारी ने क्रिटिकल केयर मेडिसिन के क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञों के योगदान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर दिया।

BHU और वाराणसी के लिए गौरव
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रो. बिक्रम कुमार गुप्ता की भागीदारी काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और भारतीय क्रिटिकल केयर चिकित्सा समुदाय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका व्याख्यान गंभीर मरीजों के उपचार में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने, एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका को रेखांकित करता है।
एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती के बीच इस तरह के वैज्ञानिक विमर्श का उद्देश्य उपचार की गुणवत्ता बेहतर बनाने और दवाओं के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
