Ashok Kumar Birthday: दादा मुनी को अपने 76वें जन्मदिन पर क्या मिली थी सबसे दर्दनाक खबर ?

Ashok km

हिंदी सिनेमा में कुछ अभिनेता अपनी लोकप्रियता के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ अपने अभिनय की वजह से इतिहास में जगह बनाते हैं। अशोक कुमार ऐसे ही कलाकार थे, जिन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में न सिर्फ कई यादगार किरदार निभाए, बल्कि बदलते सिनेमा के साथ अपनी पहचान भी कायम रखी। 

1936 में फिल्म ‘अछूत कन्या’ से चर्चा में आए अशोक कुमार ने ‘किस्मत’, ‘महल’ और ‘चलती का नाम गाड़ी’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। रोमांटिक नायक से लेकर गंभीर चरित्र अभिनेता तक, उन्होंने हर भूमिका में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘दादामुनि’ के नाम से मशहूर अशोक कुमार की 115वीं जयंती पर आइए उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में जानते हैं।

क्या था अशोक कुमार का असली नाम?
13 अक्तूबर, 1911 को भागलपुर (बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश इंडिया) में जन्में अशाेक कुमार का असल नाम कुमुदलाल गांगुली था। गायक और दिवंगत अभिनेता किशोर कुमार, अशोक कुमार के छोटे भाई थे। अशोक के पिता वकील थे।

पिता चाहते थे वकील बने बेटा
अशोक कुमार के पिता वकील थे। ऐसे में वह चाहते थे कि उनका बेटा भी इसी फील्ड में आगे जाए। ऐसे में अभिनेता ने अपने पिता की बात का मान रखा और दाखिला ले लिया, लेकिन वह पहले ही साल में फेल हो गए। अशोक इस बात से काफी डर गए थे कि जब उनके पिता को इस बारे में पता चलेगा तो न जाने वह कैसे प्रतिक्रिया देंगे।

फिल्मों में आने से पहले अशोक कुमार ने किया यह काम
अपने पिता के डर से अशोक कुमार बड़ी बहन सती देवी के घर मुंबई चले आए। वहां सती के पति बॉम्बे टॉकीज में काम किया करते हैं। ऐसे में दिग्गज दिवंगत अभिनेता ने उन दिनों उनसे नौकरी लगवाने की गुजारिश की और जीजा ने भी उन्हें बॉम्बे टॉकीज में लैबोरेटरी असिस्टेंट का काम दिला दिया। उस समय इस काम के लिए अशोक कुमार को 75 रुपये मिलते थे।

अशोक के पूर्वज थे डाकू
अशोक कुमार ने एक इंटरव्यू में अपने परिवार का किस्सा सुनाते कहा, ‘पूर्वजों के बारे में एक दिलचस्प बात है मेरे पिता जी कहते थे कि करीब 150 साल पहले बंगाल में हमारे पूर्वज डकैती करते थे। उनका नाम था रोहू डकैत और वो बहुत फेमस थे। लेकिन वो अमीरों को लूटकर गरीबों को पैसे देते थे, इसलिए लोग उन्हें बहुत चाहते थे।

कैसे मिली अशोक कुमार को डेब्यू फिल्म?
बॉम्बे टॉकीज के मालिक हिमांशु राय उस समय फिल्म ‘जीवन नैया’ बना रहे थे, जिसमें उनकी पत्नी देविका रानी और अभिनेता नज्म-उल-हसन काम कर रहे थे। लेकिन किसी वजह से हिमांशु ने फिल्म से नज्म-उल-हसन को हटा दिया और फिर बाद में उनकी जगह अशोक कुमार को लेने का सोचा।

ऐसा कहा जाता है कि फिल्म के डायरेक्टर को अशोक कुमार का चेहरा हीरो वाला नहीं लगा, लेकिन हिमांशु नहीं माने और इस तरह अशोक कुमार फिल्मों में हीरो बन गए। इसी फिल्म से उनका नाम बदल गया और इसी फिल्म में अशोक कुमार ने पहली बार गाना भी गाया था।

टूट गई थी अशोक कुमार की शादी
हीरो बनना अभिनेता के निजी जीवन में भारी पड़ गया। दरअसल, उनके परिवार वाले इस बात से खुश नहीं थे। सिर्फ इतना ही नहीं, इसी वजह से अशोक कुमार की तय हुई शादी भी टूट गई थी। ऐसे में अशोक कुमार के पिता वहां आए और उन्होंने अभिनेता को समझाने की कोशिश की कि वह फिल्में छोड़ कर नौकरी करे। जब यह बात अभिनेता ने हिमांशु को बताई, तो उन्होंने अशोक कुमार के पिता से बात की और उन्हें मना लिया कि उनका बेटा फिल्मों में ही काम करे।

एंटी हीरो रोल करने वाले पहले सुपरस्टार थे अशोक कुमार
करियर की शुरुआत में अभिनेता ने पॉजिटिव हीरो वाले किरदार निभाए थे। फिर साल 1943 में अशोक कुमार को फिल्म ‘किस्मत’ मिली, जिसमें उन्होंने एंटी-हीरो का रोल निभाया था। सैकनिल्क के अनुसार, 1943 की क्लासिक बॉलीवुड फिल्म ‘किस्मत’ ने दुनिया भर में कुल 2 करोड़ रुपये की कमाई की और इतना बिजनेस करने वाली यह पहली हिंदी फिल्म बन गई थी। अशोक कुमार अभिनय के अलावा गाना गाते थे और पेंटिंग भी करते थे। वह अक्सर न्यूड पेंटिंग बनाया करते थे।

76वें जन्मदिन पर मिली दर्दनाक खबर
मराठी अभिनेता प्रियदर्शन जाधव ने अशोक कुमार की 109वीं जयंती पर एक पोस्ट करते हुए बताया था कि 1987 के बाद अभिनेता ने अपना बर्थडे क्यों नहीं मनाया। बता दें कि आज एक तरफ जहां अशोक कुमार की जयंती है तो वहीं दूसरी तरफ उनके छोटे भाई किशोर कुमार की पुण्यतिथि भी है।

इसी का जिक्र करते हुए प्रियदर्शन ने बताया कि 13 अक्टूबर, 1987 को अशोक कुमार 76 वर्ष के हो गए थे। उस दिन एक भव्य पार्टी का आयोजन किया गया और सभी निर्माताओं की सहमति से ‘दादामुनि’ को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए सभी शूटिंग या तो रद्द कर दी गईं या स्थगित कर दी गईं।

पूरी शाम दादा अपने बंगले में आए मेहमानों का स्वागत करते रहे। मिठाई, फूलों के गुलदस्ते, खाने-पीने की चीजें और मालाओं से पूरा घर भर गया था। लेकिन दादा की नजर गेट पर टिकी थी। उनकी निगाहें अपने भाई किशोर की एक झलक देखना चाहती थी, लेकिन तभी खबर आई कि किशोर कुमार नहीं रहे। बड़े भाई के 76वें जन्मदिन पर छोटे भाई का सिर्फ 58 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

अंतिम संस्कार के समय अशोक कुमार ने मुश्किल से सिर्फ इतना कहा कि वो बचपन से मजाकिया था, पर यह कैसा मजाक है?
इसके बाद लीजेंड ने फिर कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाया और साल 2001 में 90 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

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