अंबानी के BJP चंदे पर एलन मस्क का पोस्ट, सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू

एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच भारत में सैटेलाइट इंटरनेट कारोबार को लेकर विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है. स्पेस एक्स और टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने अब रिलायंस से जुड़ी कंपनियों की ओर से BJP को दिए गए चंदे से जुड़ी खबरों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किए हैं. ये उन्होंने मुकेश अंबानी को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहकर निशाना साधने के कुछ ही घंटे बाद ही शेयर किया है. 

मस्क इससे पहले भी ये आरोप लगा चुके हैं कि भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की एंट्री में रुकावटें डाली जा रही हैं, ताकि कुछ बड़ी कंपनियों का दबदबा बना रहे. हालांकि, मस्क ने अपनी पोस्ट में रिलायंस पर लगाए गए आरोपों को लेकर कोई नया सबूत पेश नहीं किया है.

मस्क ने क्या पोस्ट किया है?
मस्क ने शाम रिलायंस से जुड़ी कंपनियों के BJP को चंदा देने से जुड़ी खबरों के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं. इससे पहले उन्होंने मुकेश अंबानी पर ट्वीट करते हुए तंज कसा था और आरोप लगाया था कि वो भारत में एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं.

मस्क ने अपनी पोस्ट में अंबानी से सवाल किया था कि क्या वो Starlink को भारत में कॉम्पिटिशन करने की अनुमति देना चाहेंगे. उनका कहना है कि देश के कई ऐसे इलाके हैं, जहां अभी भी इंटरनेट की बेहतर सुविधा नहीं है. स्टारलिंक के जरिए इन इलाकों में इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकता है.

BJP को चंदे का मुद्दा क्या है?
रिलायंस से जुड़ी कंपनियों के राजनीतिक चंदे का मुद्दा नया नहीं है. मार्च 2024 में चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद रिपोर्ट्स में बताया गया था कि रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों और व्यक्तियों ने BJP को चुनावी बॉन्ड के जरिए चंदा दिया था.

हालांकि, मस्क की ओर से इन खबरों को शेयर करने का मतलब ये नहीं है कि चंदे को लेकर लगाए गए उनके किसी आरोप साबित हो गए हैं. राजनीतिक दलों को कंपनियों से मिलने वाला चंदा और Starlink को भारत में कारोबार शुरू करने की अनुमति मिलना दो अलग-अलग मुद्दे हैं. मस्क ने इन खबरों को शेयर करके दोनों मुद्दों को बस अपने विवाद के बीच उठाया है.

स्टारलिंक की एंट्री को लेकर क्यों है विवाद?
स्टारलिंक एलन मस्क की कंपनी SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है. ये मोबाइल नेटवर्क या जमीन पर बिछाई जाने वाली फाइबर केबल के बजाय सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट कराती है. 

भारत में इस क्षेत्र में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से जुड़ी कंपनियां भी मौजूद हैं. ऐसे में स्टारलिंक की एंट्री से सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में कॉम्पिटिशन बढ़ सकती है. मस्क का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह अपने बाजार पर दबदबे को बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की राह में रुकावट डाल रहे हैं. हालांकि, उन्होंने अपने हालिया आरोपों में किसी के खिलाफ कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया है. 

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