वाराणसी जिसे की काशी भी कहा जाता है और इसे मुक्त दाहिनी भी कही जाती है अनादि काल से न जाने कितने ही नाम से पुकारा जाता है यह शहर एथेंस से भी ज्यादा पुराना है इसका अंदाजा इससे निकाला जा सकता है कि विज्ञान की एक पद्धति है सी 12 कार्बन डेटिंग जिससे कि किसी भी शहर की प्राचीनता बताई जा सकती है कि वह शहर कितना पुराना है लेकिन जब काशी की सी 12 की गई तो यह वैज्ञानिक पद्धति इसकी प्राचीनता बताने में असमर्थ हो गई क्योंकि सी 12 की भी एक सीमा है कि वह कितने समय तक प्राचीनता बता सकती है कहते हैं कि बनारस या काशी एक जीवन शहर है लाइव सिटी है यहां पर जीवन खत्म नहीं होता और वह शहर जहां मृत्यु भी उत्सव होती है जी हां हम बनारस एवं बनारस में रहने वाले बनारसियों की बात कर रहे हैं पूरे विश्व को बनारस की जनता के विषय में जानना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि सारे लोगों को यहां के लोगों के विषय में अत्यंत अल्प जानकारी उपलब्ध है शुरुआत हम करते हैं बनारस जहां बहती है जीवन की गंगा हर युग में काशी अध्यात्म संस्कृत और शिक्षा का केंद्र रहा है किसी मत का प्रवर्तन करना हो या उसका खंड नसब काशी आकरहोता है पहले सबसे महत्वपूर्ण बात है कि यहां की जनता के अंदर यह भावना है की सबसे पुराना शहर होने के बाद भी जो एक वक्त के साथ चलकर भी रुका हुआ महसूस करते हैं यहां की जनता यह भली-भांति जानती है कि इस शहर को छू नहीं सकते इतना अनछुआ है केवल गंगाजल की तरह अंजलि में भर सकते हैं यहां के लोगों की एक खासियत यह है कि यहां दिन की शुरुआत हर हर महादेव के उद्घोष के साथ शुरू होती है यहां के निवासी जो कि बनारस गलियों का शहर है हर गली में चाय की दुकान पर या किसी नुक्कड़ पर चाय पीते मिलेंगे यहां की जनता को इस बात की फिक्र नहीं होती कि आप कितना भी स्वादिष्ट भोजन या देश कीमती मिठाइयां रख दीजिए खाने को अगर उनके मुंह में बनारसी पान है तो यहां की जनता उसे भोजन या मिठाइयां को हटा देगा या मन कर देगा जब तक की उसके मुंह का पान खत्म ना हो जाए खाने का तात्पर्य है कि बनारस की 70 से 80% जनता बनारसी पान का बहुत ही शौकीन होता है जो कि हमें भी यह पता है कि बनारस पान बनारसी पान पूरे दुनिया में अपना महत्व रखती है और अब यहां की पान को भी जी ट्रेडिंग हो चुकी है बनारसी लोगो के अंदर यह मानना है कि सब गुरु हुई केहू नहीं चेला यहां की जनता सभी लोगों को गुरु शब्द से संबोधित करती है और यहां की जनता बहुत ही विनम्र स्वभाव की होती है इसका उदाहरण इसे समझा जा सकता है कि दो लोगों की लड़ाई में तीसरा आदमी आकर बीच बचाव करता है और उसकी बातें दोनों आदमी मानते हुए अपने-अपने रास्ते पर चले जाते हैं काशी के विषय में कहा जाता है कि सुबहे बनारस यानी जो यहां की सुबह होती है वह देवतुल्य होती है और यहां की जनता के अंदर या खासियत होती है की हल्की-फुल्की बातों में भी बनारसी जीवन का मार्ग बता देती है हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू बनारस एवं उनके वासियों को पूर्ण दिशा का शाश्वत नगर मानते थे बनारसी लोगों की या मानता है कि बनारस जीने का नाम है और अपने भीतर आतम्सात करने का मार्ग है काशी वासियों का ज्यादातर समय घाटों पर बितता है यहां के पक्के महल की गलियों में घूमने बनारसवासियो को बहुत पसंद है सड़क किनारे बैठकर ज्ञान की गंगा भी बहाने का शौक रखते हैं यह मजा उनको तब और आता है जब पान की गिलोरियां उनके मुंह की रौनक बढ़ा रही हो यहां की महिलाओं की सबसे पसंदीदा जगह गोदौलिया है जो कि वहां पर खरीदारी करना बनारस की हर महिला की पहली पसंद होती है बनारस की साड़ियों का तो क्या कहना हर बनारसी महिला की सपना होती है बनारसी साड़ी पहनना बनारस के लोगों के साथ घूमने का अपना अलग ही अंदाज है जो कि किसी गाइड के साथ मजा नहीं आ सकता अगर हम काशी के विद्यार्थियों की बात करें तो बीएचयू बनारस में ही है और पढ़ने का शौक रखते हैं उसके बाद यहां के विद्यार्थी संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में भी पढ़ने का गर्व महसूस करते हैं यहां के निवासियों की एक आदत यह भी है की गाली-गाली खाने खजाने ढूंढ कर खाते रहते हैं बनारस के हर गली में चाट की दुकान देखें देखने को मिल सकते हैं और यहां की दुकानों पर बनारसी भीड़ भी देखी जा सकती है बनारस की जनता शाम को अपने मित्र गणों के साथ प्रसिद्ध जगह पर बैठकर राजनीति की बात जरूर करते हैं जिसमें कि देश-विदेश और सभी विषयों पर चर्चा पर चर्चा होती रहती है राजनीति के बिना तो बनारस वासियों की बात अधूरी रह जाती है वर्तमान में यहां के सांसद माननीय नरेंद्र मोदी जी हैं जो कि भारत के प्रधानमंत्री भी है इन्हीं बनारस के वासियों में संगीत की दुनिया में बनारस घराना के लोग भी शामिल होते हैं जो कि बनारस के ठाठ के साथ जीते हैं और तीज त्योहार पर सार्वजनिक होकर नगर वासियों के साथ जीवन का आनंद उठाते हैं बनारस की जनता बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति की होती है यहां की जनता हर बात पर महादेव का नाम लेते हैं यहां के लोग विश्व प्रसिद्ध रामनगर बनारस का उपनगर का रामलीला देखने के बहुत ही शौकीन होते हैं और महिलाएं और बच्चे सुबह से ही तैयार हो जाते हैं देर रात वापस आते हैं यहां की महिलाएं शाम के समय अक्सर अपनी एरिया के नुक्कड़ पर चाट खाते मिल जाएंगे और पुरुष लोग अपने फ़ककडी अंदाज में जीते मिलेंगे इस तरह देखा जाए तो बनारस एवं उसके लोग बहुत ही मधुर संबंध लोगों से बनाकर जीवन जीते हैं ना काहू से दोस्ती ना काहू से पर यहां के निवासियों के अंदर वैमनस्य का कोई स्थान नहीं है यहां के लोग सनातन धर्म के अलावा सभी पंथ एवं मजहब को सम्मान देते हैं यहां के लोग के अंदर यह भावना रहती है कि जियो और जीने दो तभी तो एक सकरी गली में साड भी चलता है और यहां के लोग भी उसी गली में उसके साथ चलते हुए आगे निकल जाते हैं इस प्रकार हम कर सकते हैं कि बनारस एवं उसके लोग या वासी जीवंत है और यह शहर भी जीवंत है
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