नसीरुद्दीन शाह का मोदी सरकार पर बड़ा हमला! बोले- ‘नाजायज हुकूमत’, वीडियो ने बढ़ाई सियासी गर्मी

एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने एक बार फिर से छात्रों के लिए आवाज उठाई है और सरकार से सवाल किया है। दिल्ली में यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने भूख हड़ताल से एक आंदोलन शुरू किया, जो अब फैलता जा रहा है। एक्टर ने इससे पहले, कोलकाता के छात्रों के लिए भी आवाज उठाई थी। अब, वो फिर से बोल पड़े हैं। नसीरुद्दीन शाह ने सरकार से कहा कि वो खुद को दिमागी नक्सल मानते हैं, तो क्या।

वो कहते हैं, ‘मैं फख्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा मालूम नहीं क्या-क्या लकब दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को, एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या।’

नसीरुद्दीन शाह छात्रों के लिए खड़े

उन्होंने आगे कहा, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर इस मुल्क में कोई है, तो वो ये नाजायज हुकूमत है और मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं। और क्या-क्या करोगे तुम? हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने के लिए, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए, कितना करोगे? तुम और तुमने अपने इर्द-गिर्द जो बेवकूफ, बेईमानों की पलटन इकट्ठी की है, कहां तक जाओगे?’

‘लगा लो तुम पूरी ताकत’

उन्होंने आगे कहा, ‘पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, फिर सत्यजित रे फिल्म इंस्टीट्यूट और अब जामिया मिलिया… में जो छात्रों पर जुल्म किया जा रहा है, वो याद रखा जाएगा, सब याद रखा जाएगा। कर लो जितना हो सके तुमसे, और तुम्हारे वो जाहिल, नाकारा लोग जो बीजेपी आईटी सेल के मुलाजिम हैं, कितना करोगे तुम? करते रहो, पूरी ताकत लगा लो अपनी।’

पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद सरकार पर निशाना

इससे पहले, दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल चुनावों में जीत के बाद, बीजेपी उन लोगों को निशाना बना रही है जो उसकी राजनीतिक विचारधारा से सहमत नहीं हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो में शाह ने कहा, ‘बंगाल चुनावों में जीत के बाद, बीजेपी उन सभी लोगों से बदला लेने पर उतारू दिख रही है जो उसकी विचारधारा और नीतियों को नहीं मानते।’

बीजेपी कर रही फिल्ममेकर्स को डराने की कोशिश

शाह ने आरोप लगाया कि बीजेपी युवा फिल्म निर्माताओं को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी ‘देश के भावी फिल्म निर्माताओं का या तो ब्रेनवॉश करना चाहती है या उन्हें डराना चाहती है। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि ऐसा नहीं होने वाला है।’

दिल्ली में छात्रों का भूख हड़ताल

यह आंदोलन 12 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब तीन छात्रों ने छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी। 21 अक्टूबर को, विश्वविद्यालय ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया। हालांकि, छात्र एक औपचारिक अधिसूचना और चुनावों के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद चार छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। छात्रों के अनुसार, सोमवार सुबह लगभग 4 बजे तक विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ चली बातचीत के बाद, दो छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी, जबकि एबिन बेसिल और रेहान खान हड़ताल पर बने रहे।

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