Jailer 2 Review: रजनीकांत के स्वैग पर फिदा होंगे फैंस, लेकिन कहानी में कहां रह गई कमी?

सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों का अपना अलग अंदाज होता है। पर्दे पर उनकी एंट्री, दमदार डायलॉग और स्टाइलिश एक्शन दर्शकों को तालियां बजाने और सीटियां मारने पर मजबूर कर देते हैं। निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार की ‘जेलर 2’ भी इसी फॉर्मूले पर आगे बढ़ती है। फिल्म में थलाइवा का स्वैग और उनके लिए तैयार किए गए भव्य दृश्य भरपूर हैं, लेकिन कहानी के स्तर पर यह सीक्वल पहली फिल्म जैसी मजबूती हासिल नहीं कर पाती।

मुथुवेल पांडियन की वापसी और दमदार पहला हाफ

फिल्म में रजनीकांत एक बार फिर टाइगर मुथुवेल पांडियन के किरदार में नजर आते हैं। पिछली फिल्म की घटनाओं के बाद वह परिवार के साथ सामान्य जीवन बिताते दिखाई देते हैं और एक सुपरमार्केट में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते हैं। दूसरी ओर, केरल में सक्रिय गैंगस्टर दिलीप अपने दोस्त वर्मन की मौत का बदला लेने और करोड़ों रुपये की कीमती मूर्तियों से भरे लापता कंटेनरों की तलाश में जुटा है।

इसके बाद कहानी में मुथुवेल की असली रणनीति और उसके निशाने धीरे-धीरे सामने आते हैं। फिल्म का पहला हिस्सा मनोरंजन, हास्य और रोमांच के लिहाज से अच्छा प्रभाव छोड़ता है। योगी बाबू और नमो नारायण के दृश्य कई जगह हंसाते हैं, हालांकि कुछ हास्य प्रसंग दोहराव का शिकार भी होते हैं।

ब्रिज सीक्वेंस और इंटरवल से पहले का एक्शन फिल्म के प्रमुख आकर्षण हैं। इन दृश्यों में रजनीकांत की स्क्रीन प्रेजेंस और उनका दबदबा साफ दिखाई देता है।

दूसरे हाफ में कमजोर पड़ते हैं विलेन

फिल्म की सबसे बड़ी परेशानी दूसरे हिस्से में सामने आती है। यहां मुथुवेल का सामना चकरी कलपक और उसके परिवार से होता है। मिथुन चक्रवर्ती, एसजे सूर्या, विद्या बालन और अन्य कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं, लेकिन खलनायकों का यह समूह वैसा खतरा पैदा नहीं कर पाता, जिसकी उम्मीद कहानी से की जाती है।

एसजे सूर्या अपने अंदाज से कुछ प्रभाव छोड़ते हैं, जबकि विद्या बालन को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए पर्याप्त मजबूत भूमिका नहीं मिलती। मिथुन चक्रवर्ती का किरदार भी अपेक्षित प्रभाव पैदा करने में कमजोर पड़ता है। मुथुवेल को लगभग अजेय दिखाने के कारण कई संघर्ष पहले से तय नतीजे जैसे लगते हैं। इससे सस्पेंस और भावनात्मक दृश्यों का असर कम हो जाता है।

महिला किरदारों के लेखन में भी कमी महसूस होती है। कुछ दृश्य हास्य और ‘मास’ मनोरंजन के नाम पर असहज लगते हैं। फिल्म का भावनात्मक पक्ष भी दर्शकों से मजबूत जुड़ाव नहीं बना पाता।

रजनीकांत का स्वैग और अनिरुद्ध का संगीत

कमजोरियों के बावजूद रजनीकांत अपने स्टारडम से फिल्म को संभालते हैं। उनके स्लो-मोशन शॉट्स, दमदार संवाद और एक्शन वाले दृश्य प्रशंसकों को उत्साहित कर सकते हैं। उम्र को ध्यान में रखकर उनके व्यक्तित्व और स्क्रीन प्रेजेंस का इस्तेमाल करना निर्देशक की अच्छी समझ को दर्शाता है।

अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड स्कोर इन दृश्यों को और प्रभावशाली बनाता है, हालांकि गाने उतना खास असर नहीं छोड़ते।

कैमियो की भरमार, कहानी पीछे

फिल्म में मोहनलाल, शिवा राजकुमार, जैकी श्रॉफ और ऋतिक रोशन जैसे सितारों की मौजूदगी दर्शकों के लिए आकर्षण है। ऋतिक रोशन की एंट्री खास तौर पर सिनेमाघरों में उत्साह पैदा कर सकती है। लेकिन कई कैमियो कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय अचानक मदद पहुंचाने वाले प्रसंग बनकर रह जाते हैं।

कैसी है ‘जेलर 2’?

कुल मिलाकर, ‘जेलर 2’ रजनीकांत के कट्टर प्रशंसकों के लिए मनोरंजन, स्वैग और सीटीमार पलों से भरपूर अनुभव हो सकती है। लेकिन मजबूत पटकथा, प्रभावशाली खलनायक और गहराई वाली कहानी की उम्मीद करने वाले दर्शकों को निराशा हो सकती है। नेल्सन ने सुपरस्टार को पर्दे पर भव्य तरीके से पेश किया है, लेकिन इस बार कहानी उस भव्यता का पूरा साथ नहीं दे पाती। फिल्म का अंत तीसरे भाग की संभावना भी जगाता है। अब उम्मीद यही होगी कि अगली कड़ी में स्टारडम के साथ एक मजबूत कहानी भी देखने को मिले।

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