जब भी हमें कोई दवा खानी होती है, तो हम उसकी स्ट्रिप से गोली निकालकर खा लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर टैबलेट के पीछे लगी चमकदार चांदी जैसी परत आखिर क्यों होती है? ज्यादातर लोग इस पर ध्यान नहीं देते, क्योंकि यह दवा की पैकिंग का हिस्सा लगती है. हालांकि, इसके पीछे एक अहम कारण छिपा है.
दवाइयों को बनाने के बाद उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना जरूरी होता है, ताकि वे अपना असर बनाए रखें. अगर दवा नमी, धूप या हवा के संपर्क में ज्यादा आ जाए, तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि दवाओं की पैकिंग बहुत सोच-समझकर तैयार की जाती है. दवा की स्ट्रिप पर लगी चमकदार फॉइल सिर्फ पैकिंग नहीं है, बल्कि यह दवा को खराब होने से बचाने का एक उपाय है.
एल्युमिनियम फॉइल ही क्यों?
दवाओं की पैकिंग में आमतौर पर एल्युमिनियम फॉइल का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मुख्य काम दवा को बाहरी चीजों से बचाना होता है. यह फॉइल नमी, हवा और तेज रोशनी को दवा तक पहुंचने से रोकती है. ये एक ऐसा मेटल है, जो आसानी और किफायती दामों पर उपलब्ध होता है. इसलिए दवाओं की पैकेजिंग के लिए एल्यूमिनियम फॉइल इस्तेमाल किए जाते हैं.

हर दवा की पैकिंग एक जैसी क्यों नहीं होती?
आपने देखा होगा कि कुछ दवाएं स्ट्रिप में आती हैं, जबकि कुछ बोतल में रखी होती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हर दवा की बनावट और जरूरत अलग होती है. कुछ दवाएं हवा, नमी या रोशनी से जल्दी प्रभावित हो जाती हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा सुरक्षा वाली पैकिंग में रखा जाता है.
कुछ दवाओं में दोनों तरफ एल्युमिनियम क्यों होता है?
कुछ खास दवाओं को ज्यादा सेफ्टी की जरूरत होती है. ऐसे मामलों में एल्युमिनियम दोनों तरफ लगाया जाता है. इसे आमतौर पर “अलु-अलु ब्लिस्टर पैक” कहा जाता है. इससे दवा को नमी और रोशनी से और बेहतर सुरक्षा मिलती है.
क्या फॉइल दवा की एक्सपायरी बढ़ा देती है?
नहीं, फॉइल दवा की एक्सपायरी डेट नहीं बढ़ाती. इसका काम सिर्फ दवा को उसी स्थिति में सेफ रखना है, जैसी स्थिति में उसे टेस्ट किया गया था. दवा बनाने वाली कंपनियां यह जांचती हैं कि दवा कितने समय तक सही रहती है. फॉइल उस दौरान दवा को खराब होने से बचाने में मदद करती है, ताकि वह अपनी तय शेल्फ लाइफ तक प्रभावी बनी रहे.
